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Dhoni’s का ‘स्लॉग बैट’ राज, Hardik’s का कर्व सीक्रेट और Surya’s की खास पसंद ऐसे बनते हैं भारत के सिक्सर किंग!

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज सिर्फ ताकत से नहीं, बल्ले के साइंस से भी बनाते हैं बड़े शॉट्स का रिकॉर्ड

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MS Dhoni Bat Secret: कैसे हार्दिक और सूर्या अपने बल्ले से बनाते हैं बड़े छक्कों का रिकॉर्ड

क्रिकेट में छक्के लगाना सिर्फ ताकत का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीति और तकनीकी समझ भी होती है। भारतीय टीम के कई स्टार बल्लेबाज अपने बल्ले को लेकर बेहद खास होते हैं—चाहे वह वजन हो, बैलेंस हो, या फिर बल्ले का कर्व। यही छोटी-छोटी बातें उन्हें ‘सिक्सर किंग’ बनाती हैं।

सबसे पहले बात करते हैं एमएस धोनी की। मैदान पर शांत दिखने वाले धोनी अपने बल्ले के चुनाव में बेहद सोच-समझकर फैसला लेते हैं। दिलचस्प बात यह है कि धोनी अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अलग बैट रखते हैं। स्लॉग ओवर्स में बड़े शॉट्स लगाने के लिए वह थोड़ा भारी बल्ला इस्तेमाल करते हैं, जिसमें मिडिल हिस्से में अतिरिक्त वजन होता है। यही अतिरिक्त ताकत गेंद को बाउंड्री के पार भेजने में मदद करती है।

वहीं, हार्दिक पंड्या के बल्ले का ‘कर्व’ यानी हल्का झुकाव उनके शॉट्स की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। बल्ले का यह डिजाइन गेंद को बेहतर तरीके से ‘लिफ्ट’ देता है, जिससे हार्दिक के छक्के और भी ऊंचे और लंबे दिखाई देते हैं। यह तकनीक खासकर टी20 क्रिकेट में बेहद असरदार साबित होती है।

अब बात करते हैं सूर्यकुमार यादव की, जिन्हें ‘360 डिग्री प्लेयर’ कहा जाता है। सूर्या को चौड़े ग्रेन्स (wide grains) वाले बल्ले पसंद हैं। इसका फायदा यह होता है कि बल्ला ज्यादा मजबूत और टिकाऊ रहता है, साथ ही गेंद के साथ बेहतर संपर्क बनाता है। यही वजह है कि उनके शॉट्स में विविधता और नियंत्रण साफ नजर आता है।

MS Dhoni Bat Secret: कैसे हार्दिक और सूर्या अपने बल्ले से बनाते हैं बड़े छक्कों का रिकॉर्ड


युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा भी अपने बल्ले के चयन में खास ध्यान देते हैं। वह अपेक्षाकृत हल्का बल्ला इस्तेमाल करते हैं, जिससे वह स्पिनर्स के खिलाफ स्वीप और रिवर्स स्वीप आसानी से खेल सकें। उनके बल्ले का ‘स्वीट स्पॉट’ नीचे की ओर होता है, जो धीमी पिचों पर ज्यादा कारगर साबित होता है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में बैट बनाने वाली कंपनियां जैसे SG और SS, खिलाड़ियों की जरूरत के हिसाब से बल्ले तैयार करती हैं। उनका लक्ष्य होता है ‘परफेक्ट 10’ स्कोर वाला बल्ला बनाना—जहां वजन, बैलेंस, और रिबाउंड का सही मेल हो।

आज के दौर में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि विज्ञान बन चुका है। हर शॉट के पीछे तकनीक, हर छक्के के पीछे सोच और हर बल्ले के पीछे महीनों की मेहनत छिपी होती है। यही कारण है कि भारतीय बल्लेबाज दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

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