Stock Market
‘सबसे बदकिस्मत निवेशक’ भी बना करोड़पति! मार्केट टाइमिंग के मिथक पर Aashish Somaiyaa का बड़ा बयान
35 साल तक हर बार ऊंचे स्तर पर निवेश करने के बावजूद मिला शानदार रिटर्न, एक्सपर्ट बोले—टाइमिंग नहीं, धैर्य है असली गेम
शेयर बाजार में अक्सर कहा जाता है कि सही समय पर निवेश करना ही सफलता की कुंजी है। लेकिन अब इस धारणा को चुनौती देते हुए Aashish Somaiyaa ने साफ कहा है कि “मार्केट टाइमिंग” उतनी मायने नहीं रखती, जितना कि लंबे समय तक निवेश में टिके रहना।
दरअसल, पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट Monika Halan का एक उदाहरण इन दिनों चर्चा में है। इसमें बताया गया कि अगर कोई निवेशक 35 साल तक हर साल BSE Sensex के 52-वीक हाई पर भी निवेश करता, तब भी उसका ₹35 लाख का निवेश बढ़कर ₹3 करोड़ से ज्यादा हो जाता।
इस उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय में कंपाउंडिंग (compounding) की ताकत, गलत टाइमिंग के असर को काफी हद तक कम कर देती है।
लंबी अवधि में टाइमिंग का असर क्यों घट जाता है?
Somaiyaa के अनुसार, अगर कोई निवेश सिर्फ 1 साल के लिए है, तो एंट्री टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन जैसे-जैसे निवेश की अवधि 10–15 साल या उससे अधिक होती है, टाइमिंग का प्रभाव बहुत कम हो जाता है।
यही बात SIP (Systematic Investment Plan) पर भी लागू होती है। भले ही कोई निवेशक हर महीने सबसे खराब समय पर निवेश करे, फिर भी लंबे समय में उसके रिटर्न में बहुत मामूली अंतर ही आता है।
फिर भी लोग क्यों करते हैं टाइमिंग की कोशिश?
इसका जवाब इंसानी व्यवहार में छिपा है। Somaiyaa बताते हैं कि निवेशक अक्सर यह मान लेते हैं कि अगर वे पिछले मार्केट ट्रेंड को समझ लेते हैं, तो भविष्य का अंदाजा भी लगा सकते हैं।
लेकिन हकीकत यह है कि बाजार में अचानक आने वाले बदलाव—जैसे ग्लोबल घटनाएं या आर्थिक फैसले—किसी भी समय ट्रेंड बदल सकते हैं।
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SIP जारी रखना ही समझदारी
वोलैटाइल मार्केट में Somaiyaa की सलाह साफ है—SIP को कभी न रोकें। गिरते बाजार में निवेश बंद करना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे सस्ते दाम पर खरीदने का मौका छूट जाता है।
Lump Sum निवेश के लिए क्या करें?
अगर आप एकमुश्त निवेश कर रहे हैं, तो पूरे पैसे को एक साथ लगाने के बजाय धीरे-धीरे (staggered manner) निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। इससे जोखिम कम होता है और बाजार के उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सकता है।

Asset Allocation है असली चाबी
Somaiyaa का मानना है कि सही एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) अपनाने से निवेशक अपने आप ‘लो में खरीदो और हाई में बेचो’ की रणनीति पर काम करने लगते हैं।
जब कोई एसेट महंगा हो जाता है, तो उसमें निवेश कम करके दूसरे विकल्पों में शिफ्ट करना समझदारी होती है।
निष्कर्ष
शेयर बाजार में सफलता का राज “सही समय” नहीं, बल्कि “लंबे समय तक बने रहना” है। धैर्य, अनुशासन और सही रणनीति अपनाकर कोई भी निवेशक बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है—चाहे शुरुआत कितनी भी ‘गलत टाइमिंग’ से क्यों न हुई हो।
