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टी20 में यही तो आख़िरी चीज़ चाहिए” — Shubman Gill’s की बल्लेबाज़ी पर Sanjay Manjrekar’s का तीखा तंज
वर्ल्ड कप टीम से बाहर होने के बाद बढ़ी बहस, पूर्व बल्लेबाज़ बोले— सेलेक्टर्स ने देर से सुधारी गलती
भारतीय टी20 क्रिकेट में Shubman Gill को लेकर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड से बाहर किए जाने के बाद पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ Sanjay Manjrekar ने गिल की टी20 बल्लेबाज़ी पर सीधा और तीखा बयान देकर क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी है।
मांजरेकर का मानना है कि गिल की टी20 टीम में एंट्री और फिर वर्ल्ड कप से ड्रॉप होना, असल में चयनकर्ताओं द्वारा एक पुरानी गलती को ठीक करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके शब्दों में, “टी20 क्रिकेट में आप जो सबसे आख़िरी चीज़ चाहते हैं, वही गिल की बल्लेबाज़ी में दिखती है।”
टी20 फॉर्म पर सवाल क्यों?
गिल की टी20I में वापसी पिछले साल जुलाई के बाद हुई थी, जब वह करीब 14 महीनों तक इस फॉर्मेट से दूर रहे। सितंबर 2025 में एशिया कप के लिए उन्हें न सिर्फ टीम में शामिल किया गया, बल्कि उपकप्तान भी बनाया गया। यहीं से उम्मीदें तेज़ी से बढ़ीं—लेकिन मैदान पर प्रदर्शन उन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा।
मांजरेकर के मुताबिक, टी20 में जहां तेज़ निर्णय, निरंतर आक्रामकता और जोखिम उठाने की क्षमता चाहिए, वहां गिल का नैचुरल खेल ज़्यादा ठहराव वाला दिखा। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में गिल का नेतृत्व और इंग्लैंड दौरे पर उनकी कप्तानी काबिले-तारीफ रही, लेकिन उसी चमक के प्रभाव में टी20 चयन को आगे बढ़ाना चयनकर्ताओं की भूल थी।
वर्ल्ड कप स्नब और चयनकर्ताओं का संदेश
हालिया टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड में गिल को बाहर रखने को मांजरेकर ने स्पष्ट संकेत बताया—कि चयनकर्ता अब भूमिका-आधारित चयन पर लौट रहे हैं। उनके अनुसार, “टी20 टीम में नाम नहीं, फिटमेंट ऑफ स्किल्स मायने रखती है।”

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ धर्मशाला में खेले गए मुकाबले में Marco Jansen के सामने गिल का आउट होना भी चर्चा में रहा, जहां स्ट्राइक-रेट और शॉट-सेलेक्शन पर सवाल उठे।
क्या गिल के लिए दरवाज़ा बंद है?
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि यह फैसला स्थायी नहीं है। गिल अगर टी20 में अपने खेल की रफ्तार, पावर-हिटिंग और इंटेंट को निखारते हैं, तो वापसी की राह खुली है। लेकिन फिलहाल संदेश साफ़ है—टी20 में वही खेलेगा, जो इस फॉर्मेट की मांग पूरी करे।
बड़ी तस्वीर
यह पूरा प्रकरण भारतीय क्रिकेट की बदलती सोच को दिखाता है—जहां फॉर्मेट-स्पेसिफिक विशेषज्ञता को प्राथमिकता दी जा रही है। T20 World Cup जैसे बड़े मंच पर प्रयोग की गुंजाइश कम होती है, और चयनकर्ता अब उसी हिसाब से कड़े फैसले ले रहे हैं।
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