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टूटे सपनों से वापसी तक: Rinku Singh’s की वो पारी जिसने सब कुछ बदल दिया
ग़म, आलोचना और गिरती फॉर्म के बीच रिंकू ने लखनऊ में खेली ऐसी पारी, जिसने उनके जज़्बे को फिर जिंदा कर दिया
क्रिकेट में सिर्फ रन ही कहानी नहीं लिखते, कभी-कभी एक खिलाड़ी की भावनाएं, उसका संघर्ष और उसका धैर्य ही सबसे बड़ी कहानी बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब Rinku Singh ने लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अपनी शानदार पारी के बाद ज़मीन को चूम लिया।
यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि एक साल के दर्द, संघर्ष और टूटते आत्मविश्वास की कहानी का अंत था।
पिछले एक साल ने रिंकू सिंह को अंदर तक झकझोर दिया था। टी20 वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने अपने पिता को खो दिया — एक ऐसा झटका, जिससे उबरना किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता। इसके बाद भारतीय टीम में उनकी जगह भी छिन गई। IPL में शुरुआत अच्छी रही, लेकिन धीरे-धीरे उनकी फॉर्म लड़खड़ाने लगी। उनकी टीम अंक तालिका में नीचे खिसकती गई और आलोचकों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए।
ऐसे में रिंकू जैसे खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा संघर्ष मैदान के बाहर नहीं, बल्कि अपने ही मन के भीतर होता है।
लखनऊ में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच उनके लिए एक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाज़ी की, दबाव को संभाला और आखिरकार एक महत्वपूर्ण अर्धशतक जड़ा। यही नहीं, उन्होंने फील्डिंग में भी कमाल दिखाते हुए पांच शानदार कैच पकड़े और सुपर ओवर में खुद जीत दिलाने वाले रन भी बनाए।
मैच खत्म होते ही रिंकू ने अपने जज़्बातों को रोकना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने हवा में मुक्का लहराया, मैदान को चूमा और आसमान की तरफ देखा — मानो अपने पिता को याद कर रहे हों।

मैच के बाद उन्होंने कहा,
“कभी-कभी जब आप संघर्ष कर रहे होते हैं, तो दिमाग काम करना बंद कर देता है।”
यह बयान सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि हर उस इंसान का है जो मुश्किल दौर से गुजरता है।
रिंकू की यह पारी सिर्फ स्कोरकार्ड में दर्ज एक अर्धशतक नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास की वापसी है, जो कहीं खो गया था। यह पारी शायद दुनिया को कुछ साबित करने के लिए नहीं थी, बल्कि खुद को याद दिलाने के लिए थी कि वह अभी भी वही खिलाड़ी हैं, जो मैच पलट सकते हैं।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती — बल्कि यहीं से एक नई शुरुआत होती है।
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