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Noida मजदूर आंदोलन का असर? केंद्र सरकार दैनिक न्यूनतम मजदूरी Rs 350-450 करने की तैयारी में

2017 से Rs 176 पर अटकी minimum wage को बढ़ाने की कवायद तेज, UP और Haryana पहले ही बढ़ा चुके हैं wages – अब Centre की बारी

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Minimum Wage Hike 2026: केंद्र Rs 350-450 करने की तैयारी में, Noida protests का असर | Dainik Diary
केंद्र सरकार national minimum daily wage को Rs 176 से बढ़ाकर Rs 350-450 करने पर विचार कर रही है, Noida मजदूर आंदोलन के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।

Noida और Ghaziabad में हाल ही में हुए मजदूर आंदोलनों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगा है। Mint की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार देश की राष्ट्रीय दैनिक न्यूनतम मजदूरी यानी national daily minimum wage को बढ़ाकर Rs 350 से Rs 450 के बीच करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

2017 से नहीं बदली थी minimum wage

यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि अभी तक देश की राष्ट्रीय floor wage Rs 176 प्रतिदिन है, जो 2017 में तय की गई थी। यानी आठ साल में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। एक बार central floor wage notify होने के बाद कोई भी राज्य इससे कम wage नहीं दे सकता।

Union labour ministry skilled, semi-skilled और unskilled तीनों categories के लिए नई wage structure तैयार कर रही है। एक source ने Mint को बताया, “Government wage finalize करने की प्रक्रिया में है और राज्यों, industries तथा अन्य stakeholders के साथ consultations लगभग पूरे हो चुके हैं।”

Noida-Ghaziabad से उठी चिंगारी

हाल ही में Uttar Pradesh के Noida और Ghaziabad में मजदूरों ने अपनी कम wages को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किए। इसके बाद UP सरकार ने Noida और Ghaziabad के unskilled workers की monthly wage Rs 11,313 से बढ़ाकर Rs 13,690 कर दी। Semi-skilled workers की salary Rs 12,445 से Rs 15,059 और skilled workers की Rs 13,940 से Rs 16,868 कर दी गई।

Haryana ने भी minimum wages में करीब 35% की बढ़ोतरी की है, जिससे unskilled workers की monthly pay करीब Rs 15,200 हो गई है।

महीने में 26 दिन का हिसाब

नई व्यवस्था के तहत monthly wage की गणना daily wage को 26 से गुणा करके की जाएगी। यानी अगर daily wage Rs 450 तय होती है, तो monthly wage करीब Rs 11,700 होगी।

यह बदलाव Code on Wages, 2019 के तहत किया जा रहा है, जो एक common baseline तय करता है और सभी worker categories पर लागू होता है। सरकार के चारों new labour codes – Code on Wages, Industrial Relations Code, Code on Social Security और Occupational Safety Code – अब operational हो चुके हैं।

Corporate मुनाफा बढ़ा, wages नहीं

Economic Survey 2024-25 में यह बात उठाई गई थी कि जहां companies ने पिछले चार वर्षों में करीब 22% का EBITDA margin बनाए रखा, वहीं wage growth में मंदी आई है। Entry-level IT salaries में भी stagnation देखा गया है। यही वो बड़ी वजह है जिसने मजदूर असंतोष को बढ़ावा दिया।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Madras School of Economics के director और professor N.R. Bhanumurthy का कहना है कि wages हर साल local cost-of-living के आधार पर revise होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर revisions annually होती हैं तो industry पर burden smooth रहता है। लेकिन अगर दो-तीन साल का inflation एक साथ जोड़ा जाए तो यह industry planning को disrupt कर सकता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों ने सालों से wage structure revise नहीं किया है, और नियमित annual revision ही labour unrest से बचने का sustainable तरीका है।

दूसरे राज्य भी तैयार

Maharashtra, Karnataka, Gujarat और Tamil Nadu ने संकेत दिया है कि वे जरूरत पड़ने पर wages review करेंगे, क्योंकि उनकी existing wages पहले से ही proposed floor wage के करीब या उससे ऊपर हैं। Bihar और Punjab भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। एक Punjab सरकार के official ने Mint को बताया कि राज्य ने अपना wage hike proposal finance department को भेज दिया है।

BJP नेता और पूर्व Bihar minister Ram Surat Rai और senior Congress leader Ranjeet Ranjan दोनों ने wages को inflation से जोड़ने और annual revision की जरूरत पर जोर दिया है।

यह फैसला अगर जल्द लागू होता है, तो यह करोड़ों मजदूरों की जिंदगी बदल सकता है। नजरें अब Labour Ministry के अगले कदम पर टिकी हैं।

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