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Justice Yashwant Varma ने cash-pile probe से हटते हुए लगाए गंभीर आरोप, बोले—“पूरी प्रक्रिया unfair थी”
Resignation के बाद 13-page letter में कहा—जांच पहले से ही तय दिशा में जा रही थी, सबूत और प्रक्रिया दोनों पर उठाए सवाल
Allahabad High Court के judge Justice Yashwant Varma ने अपने खिलाफ चल रही cash recovery मामले की parliamentary inquiry से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने इस फैसले के साथ एक 13-page लंबा पत्र भी inquiry committee को भेजा, जिसमें जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
यह पत्र 9 April को भेजा गया, उसी दिन जब उन्होंने President Droupadi Murmu को अपना resignation सौंपा। इस तरह उनके खिलाफ चल रही Lok Sabha द्वारा गठित inquiry भी लगभग समाप्त मानी जा रही है।
“जांच शुरू से ही unfair थी” — Justice Varma
अपने पत्र में Justice Varma ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पूरी inquiry “unfairness से भरी हुई थी” और शुरुआत से ही प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उनके खिलाफ निर्णय पहले ही तय कर लिया गया था और उन्हें केवल एक formal प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।
cash recovery case की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला March 2025 में उस घटना से जुड़ा है, जब Delhi स्थित उनके official residence में आग लगने के बाद कथित रूप से unaccounted cash मिलने की बात सामने आई थी।
इसके बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया और Parliament द्वारा एक inquiry committee गठित की गई, जिसमें शामिल थे:
- Supreme Court Judge Aravind Kumar
- Bombay High Court Chief Justice Shree Chandrashekhar
- Senior Advocate BV Acharya

“मुझे ठीक से सुनवाई का मौका नहीं मिला”
Justice Varma ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि उन्हें अपनी सफाई देने का उचित अवसर नहीं दिया गया। उनके अनुसार, जांच प्रक्रिया में कई procedural safeguards को नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ evidence को test करने का मौका भी नहीं दिया गया, जिससे fairness का मूल सिद्धांत प्रभावित हुआ।
सबूतों पर उठाए सवाल
अपने पत्र में उन्होंने सबसे ज्यादा सवाल video recordings और alleged cash recovery पर उठाए।
उनका कहना है कि:
- वीडियो उनकी अनुपस्थिति में बनाए गए
- उनकी authenticity और integrity सुनिश्चित नहीं की गई
- chain of custody पर गंभीर सवाल हैं
- उनके खिलाफ direct evidence नहीं है
उन्होंने दावा किया कि alleged cash और उनके बीच कोई direct connection साबित नहीं हुआ है।
“media trial” का आरोप
Justice Varma ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में उन्हें public “vilification” का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में तेजी से एक sensational narrative फैलाया गया, जिसने उन्हें दोषी की तरह पेश किया, जबकि कोई final adjudication नहीं हुआ था।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा मामला Supreme Court of India की website पर सामग्री आने के बाद और ज्यादा prejudiced हो गया।
“presumption of innocence खत्म हो गया”
पत्र में उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने उनके खिलाफ presumption of innocence को कमजोर कर दिया और उनकी reputation को irreparable नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने दोहराया कि उनका cash recovery से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने उस storeroom का उपयोग किया था, जहां से कथित cash मिला था।
resignation के साथ खत्म हुई inquiry
9 April को भेजे गए इस पत्र के साथ ही Justice Varma ने President Droupadi Murmu को अपना resignation भी सौंप दिया, जिसके बाद यह पूरा parliamentary inquiry process अब समाप्त माना जा रहा है।
अपने पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि वे “deepest sadness” के साथ यह कदम उठा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि इतिहास इस मामले में उनके साथ हुई “unfairness” को याद रखेगा।
