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Noida से उठी आवाज़: India में एक factory worker की कमाई जानकर आप सोच में पड़ जाएंगे
सिर्फ ₹20,000 की मांग कर रहे हैं मज़दूर — PLFS 2025 के आंकड़े बताते हैं manufacturing workers की असली तस्वीर
Noida की सड़कों पर उतरे factory workers की एक मांग ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ये मज़दूर मांग कर रहे हैं — महज़ ₹20,000 प्रति माह। White-collar नौकरियों में बैठे लोगों के लिए यह आंकड़ा शायद बहुत छोटा लगे, लेकिन India के manufacturing sector की हकीकत यही है। और इसे साबित करते हैं देश के सबसे ताज़ा आधिकारिक labor market database — Periodic Labour Force Survey 2025 के आंकड़े।
औसत factory worker कितना कमाता है?
India में कुल workers का 25% हिस्सा salaried यानी तनख्वाहदार कर्मचारियों का है। इनमें से manufacturing salaried workers की हिस्सेदारी 5.8% है। PLFS 2025 के मुताबिक एक manufacturing salaried worker की औसत मासिक आय ₹18,735 है — जो सभी industries में एक औसत salaried worker की कमाई ₹22,699 से भी कम है।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अगर किसी manufacturing worker को ₹22,500 प्रति माह मिल रहा है तो वह अपने क्षेत्र के top 20% सबसे ज़्यादा कमाने वाले workers में शामिल हो जाता है। यानी 80% manufacturing workers इससे भी कम कमाते हैं।
तनख्वाह कम — अधिकार भी नहीं
नौकरी सिर्फ तनख्वाह से नहीं आंकी जाती। Written contract, paid leave और social security भी ज़रूरी हिस्से हैं। लेकिन manufacturing workers इन मामलों में भी पीछे हैं। PLFS data के अनुसार सिर्फ 16.5% manufacturing workers के पास written contract है। केवल 20% को किसी न किसी रूप में social security benefits और paid leave मिलती है।
44% manufacturing workers self-employed हैं जिनके लिए ये सुविधाएं वैसे भी लागू नहीं होतीं। लेकिन यह राहत की बात नहीं क्योंकि self-employed manufacturing workers की कमाई salaried manufacturing workers से भी कम है।
उम्र बढ़ने के साथ घटती जाती है कमाई

यह शायद सबसे तकलीफदेह आंकड़ा है। 15 से 18 साल के manufacturing workers की औसत तनख्वाह economy-wide average से थोड़ी बेहतर होती है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है यह फायदा उल्टा पड़ने लगता है। 40 साल से ऊपर के manufacturing workers की तनख्वाह उसी उम्र के औसत salaried person से करीब 20% कम हो जाती है।
यानी जो व्यक्ति manufacturing में career बनाना चाहता है उसके लिए यह sector समय के साथ और कठिन होता जाता है — न कि बेहतर।
Contract workers की बढ़ती तादाद ने और बिगाड़े हालात
Annual Survey of Industries यानी ASI के आंकड़े बताते हैं कि India की registered factories में contract workers की हिस्सेदारी साल 2000-01 में 20% थी जो 2023-24 में बढ़कर 42% हो गई है। यानी पिछले दो दशकों में यह दोगुने से भी ज़्यादा हो गई है।
Contract workers को आमतौर पर directly hire किए गए workers से कम वेतन मिलता है और उनके पास कोई benefits भी नहीं होते। यह trend manufacturing workers की स्थिति को और अधिक अनिश्चित बना रहा है।
Noida protests की असली वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इन protests का तात्कालिक कारण cooking gas जैसी ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतें हो सकती हैं। लेकिन असली गुस्सा सालों से जमा हुई उस आर्थिक तंगी का है जिसमें ये मज़दूर दिन-रात काम करते हुए भी एक सम्मानजनक जीवन नहीं जी पा रहे।
₹20,000 की मांग कोई बड़ी मांग नहीं है — यह बस एक इंसानी ज़िंदगी जीने की गुज़ारिश है।
