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लाल सागर से दूरी क्यों? USS George W. Bush ने चुना लंबा रास्ता, हूती खतरे से बढ़ी चिंता
अमेरिकी सुपरकैरीयर अफ्रीका का चक्कर लगाकर पहुंच रहा मध्य पूर्व, रेड सी में बढ़ते हमलों का असर
दुनिया की सबसे ताकतवर नौसैनिक ताकत माने जाने वाले अमेरिका को भी अब अपने रास्ते बदलने पड़ रहे हैं। अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक विमानवाहक पोत USS George H.W. Bush इन दिनों चर्चा में है, क्योंकि यह सामान्य रास्ता छोड़कर अफ्रीका के चारों ओर लंबा मार्ग अपनाकर मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है।
आमतौर पर अमेरिका के ईस्ट कोस्ट से मध्य पूर्व जाने वाले युद्धपोत जिब्राल्टर जलडमरूमध्य, भूमध्य सागर और फिर स्वेज नहर होते हुए लाल सागर से गुजरते हैं। लेकिन इस बार USS जॉर्ज बुश ने इस रास्ते से दूरी बना ली है।
क्यों बदला गया रास्ता?
पेंटागन ने इस बदलाव पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे यमन के हूती विद्रोहियों का बढ़ता खतरा है।
हूती समूह, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है, पिछले कुछ समय से लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले करता रहा है। इन हमलों ने न सिर्फ व्यापारिक जहाजों को प्रभावित किया, बल्कि सैन्य जहाजों के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है।
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इसी वजह से अमेरिका ने अपने सबसे बड़े और अहम युद्धपोत को सीधे खतरे वाले क्षेत्र से दूर रखने का फैसला लिया है।
अफ्रीका के रास्ते लंबी यात्रा
USS जॉर्ज बुश को नामीबिया के तट के पास देखा गया, जहां से यह अफ्रीका के दक्षिणी सिरे “केप ऑफ गुड होप” को पार करते हुए हिंद महासागर में प्रवेश करेगा। यह रास्ता सामान्य मार्ग की तुलना में करीब 1.5 गुना लंबा है।
इस यात्रा में जहाज के साथ लगभग 5,000 नौसैनिक और एयरक्राफ्ट विंग के सदस्य शामिल हैं, जो इसे एक पूर्ण युद्धक समूह बनाते हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य गतिविधि
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमानवाहक पोत मध्य पूर्व में पहले से तैनात USS Abraham Lincoln के साथ जुड़ सकता है। इससे साफ है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत कर रहा है।
खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के इलाकों में तनाव बढ़ने के कारण अमेरिका सतर्क नजर आ रहा है।

बाब-अल-मंदेब: दुनिया का अहम तेल मार्ग
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो सिर्फ 32 किलोमीटर चौड़ा है, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का सैन्य या आतंकी खतरा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के चलते यह इलाका “खतरनाक जोन” बनता जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर असर पड़ रहा है।
क्या बदल रहा है वैश्विक संतुलन?
USS जॉर्ज बुश का रास्ता बदलना सिर्फ एक सैन्य निर्णय नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव हो रहा है। अब समुद्री मार्गों पर खतरा इतना बढ़ गया है कि अमेरिका जैसे देश को भी रणनीति बदलनी पड़ रही है।
यह घटनाक्रम आने वाले समय में मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
