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UN में अमेरिका को झटका: रूस-चीन ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य प्रस्ताव पर लगाया वीटो
तेल आपूर्ति बहाल कराने की कोशिश नाकाम, ट्रंप की डेडलाइन से पहले बढ़ा वैश्विक तनाव
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। Russia और China ने United Nations Security Council में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसका उद्देश्य Strait of Hormuz को फिर से खोलना था।
यह मतदान ऐसे समय हुआ जब Donald Trump ने ईरान को चेतावनी देते हुए जलडमरूमध्य खोलने के लिए समयसीमा तय कर रखी थी। प्रस्ताव पर मतदान में 11 देशों ने समर्थन किया, जबकि रूस और चीन ने विरोध में वोट देकर इसे रोक दिया। Pakistan और Colombia ने मतदान से दूरी बनाई।
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दरअसल, होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल खपत गुजरती है। Iran द्वारा इस रास्ते को प्रभावी रूप से बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट गहरा गया है और तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है।

इससे पहले प्रस्ताव का एक कड़ा मसौदा सामने आया था, जिसमें “all necessary means” जैसे शब्द शामिल थे—जो आमतौर पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति का संकेत माने जाते हैं। हालांकि, रूस, चीन और France के विरोध के बाद इस भाषा को हटा दिया गया था।
फिर भी संशोधित प्रस्ताव भी पारित नहीं हो सका। रूस और चीन ने इसे युद्ध को बढ़ावा देने वाला कदम बताते हुए खारिज कर दिया। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना था कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने के लिए जरूरी है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी में अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव पहले ही चरम पर है। अब इस वीटो के बाद कूटनीतिक समाधान की राह और मुश्किल हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं संभली, तो इसका असर न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी लंबे समय तक पड़ सकता है।
