Connect with us

Business

₹5,100 करोड़ देकर बच निकले Sandesara? सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठे सवाल, बैंकों का दावा—₹19,000 करोड़ से ज्यादा बकाया!

Supreme Court of India के आदेश के बाद Sterling Biotech केस में नया मोड़—बैंकों ने बताया असली नुकसान

Published

on

Sterling Biotech केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Sandesara ग्रुप को राहत, लेकिन बैंकों का दावा—नुकसान कहीं ज्यादा।

देश के बड़े बैंक घोटालों में शामिल रहे Sterling Biotech Ltd और उसके प्रमोटर्स को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है।

Supreme Court of India के आदेश के बाद जहां Sandesara परिवार को राहत मिली, वहीं अब बैंकों के दावे ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।

₹5,100 करोड़ जमा कर खत्म हुई कार्रवाई?

पिछले साल 19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए Nitin Sandesara और Chetan Sandesara समेत कंपनी के प्रमोटर्स के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने की अनुमति दे दी थी।

लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी गई—उन्हें 5,100 करोड़ जमा करने होंगे, जिसे “फुल एंड फाइनल सेटलमेंट” माना गया।

Sandesara ग्रुप ने यह रकम जमा भी कर दी, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई बंद हो गई।

बैंकों का दावा—असल नुकसान कहीं ज्यादा

अब इसी मामले में नया मोड़ तब आया जब बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया।

बैंकों के मुताबिक, Sandesara ग्रुप की कंपनियों पर कुल बकाया रकम करीब 19,283 करोड़ है।

यानी जो 5,100 करोड़ जमा किए गए, वह कुल बकाया का केवल एक हिस्सा ही है।

यह खुलासा सामने आते ही सवाल उठने लगे हैं—क्या इतने बड़े घाटे के बावजूद यह समझौता सही था?

विदेशी कंपनियों को भी मिलेगा हिस्सा

मामले में शामिल पांच विदेशी संस्थाओं का भी बकाया सामने आया है, जो करीब 463 करोड़ बताया गया है।

इनमें से उन्हें करीब 120 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

यह दिखाता है कि यह मामला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन से भी जुड़ा हुआ है।

फैसले पर उठ रहे सवाल

कई वित्तीय विशेषज्ञ और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े लोग अब इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

उनका कहना है कि:

Supreme Court Patanjali

  • इतनी बड़ी रकम का नुकसान होने के बावजूद कम राशि पर समझौता क्यों?
  • क्या इससे भविष्य में ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलेगा?
  • क्या यह बैंकों और आम जनता के हित में है?

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से बेहतर है कि आंशिक रिकवरी ही सही, लेकिन जल्दी हो जाए।

क्या कहता है पूरा मामला?

Sterling Biotech और उसके प्रमोटर्स पर आरोप था कि उन्होंने बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ के लोन का सही उपयोग नहीं किया और डिफॉल्ट किया।

जांच एजेंसियों और बैंकों के बीच लंबी बातचीत के बाद ₹5,100 करोड़ की राशि तय की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में और कानूनी या वित्तीय कार्रवाई होगी या यह यहीं खत्म हो जाएगा।

फिलहाल, यह मामला देश के बैंकिंग सिस्टम और बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट्स पर एक बार फिर बहस छेड़ चुका है।

और पढ़ें- DAINIK DIARY