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40 की उम्र में सिंगल रहना क्यों गलत नहीं: निम्रत कौर ने शादी को लेकर समाज की सोच पर उठाए सवाल

“शादी में लोग सबसे ज़्यादा अस्थिर और बेचैन हो जाते हैं,” निम्रत कौर का बेबाक बयान, मनोवैज्ञानिक ने भी दी अहम राय

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Nimrat Kaur on Being Single at 40: Marriage Pressure and Society’s Mindset
शादी और सिंगल लाइफ को लेकर समाज की सोच पर खुलकर बोलतीं अभिनेत्री निम्रत कौर

भारतीय समाज में शादी को आज भी एक “ज़रूरी पड़ाव” माना जाता है, खासकर महिलाओं के लिए। अगर उम्र 30 के पार हो जाए और शादी न हुई हो, तो सवाल, ताने और सलाहें अपने आप शुरू हो जाती हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री निम्रत कौर ने हाल ही में इसी सोच पर खुलकर बात की और बताया कि 40 की उम्र में सिंगल रहना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया फैसला भी हो सकता है

निम्रत कौर ने एक इंटरव्यू में कहा कि शादी को लेकर सवाल उन्हें उनके 20s के आखिरी सालों से ही झेलने पड़े। उन्होंने साफ कहा कि यह अनुभव लगभग हर महिला का होता है। समाज तब तक किसी महिला की मेहनत और पहचान को गंभीरता से नहीं लेता, जब तक वह किसी तय ढांचे में फिट न बैठ जाए।

उन्होंने कहा कि जब तक फिल्म The Lunchbox नहीं आई, तब तक उन्हें अपने आसपास के “शुभचिंतकों” से वह सम्मान और स्वीकार्यता नहीं मिली, जिसकी उम्मीद हर कलाकार को होती है। उस फिल्म में इरफान खान जैसे दिग्गज कलाकार के साथ काम करने के बाद अचानक लोगों का नजरिया बदल गया।

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निम्रत ने बेहद ईमानदारी से यह भी स्वीकार किया कि कई बार लोग सिर्फ समाज के डर से नकली या समझौता भरी शादियों में फंस जाते हैं। उनके शब्दों में, “लोग सबसे ज़्यादा परेशान, अस्थिर और अनहिंज्ड शादियों में ही दिखते हैं।” यह बयान भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन आज की हकीकत से दूर नहीं है।

इस मुद्दे पर मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि शादी अपने आप में खुशी की गारंटी नहीं होती। अगर व्यक्ति भावनात्मक रूप से तैयार नहीं है या सही साथी नहीं मिला है, तो अकेले रहना कहीं ज़्यादा संतुलित और मानसिक रूप से स्वस्थ विकल्प हो सकता है। समाज का दबाव कई बार लोगों को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देता है, जिनका खामियाजा सालों तक भुगतना पड़ता है।

निम्रत कौर का नजरिया उन महिलाओं की आवाज़ बनता दिख रहा है, जो अपने करियर, आत्मसम्मान और मानसिक शांति को प्राथमिकता देना चाहती हैं। आज के दौर में रिश्तों की परिभाषा बदल रही है और शायद अब यह स्वीकार करने का समय आ गया है कि सिंगल रहना भी उतना ही वैध और सम्मानजनक विकल्प है, जितना शादीशुदा होना

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