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“Narendra Modi Stadium को गिराकर फिर से बनाना चाहिए?” Lalit Modi के बयान ने छेड़ दी भारतीय क्रिकेट की बड़ी बहस

पूर्व IPL कमिश्नर Lalit Modi बोले- सिर्फ दर्शक क्षमता नहीं, विश्वस्तरीय सुविधाओं की भी जरूरत; भारतीय स्टेडियमों के मॉडल पर उठाए सवाल

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Lalit Modi on Narendra Modi Stadium: भारतीय क्रिकेट स्टेडियमों को लेकर दिया बड़ा बयान

भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा जुनून है। लेकिन क्या देश के क्रिकेट स्टेडियम उस जुनून के मुताबिक सुविधाएं दे पा रहे हैं? इसी सवाल को लेकर पूर्व IPL कमिश्नर Lalit Modi ने एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ दी है।

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में Lalit Modi ने कहा कि भारत के अधिकांश क्रिकेट स्टेडियम आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानकों से काफी पीछे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में गिने जाने वाले Narendra Modi Stadium को भी भविष्य में पूरी तरह से दोबारा डिजाइन और विकसित किया जाना चाहिए।

सिर्फ बड़ा स्टेडियम होना काफी नहीं

Lalit Modi का मानना है कि किसी स्टेडियम की सफलता केवल उसकी सीटों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में दर्शक सिर्फ मैच देखने नहीं आते, बल्कि वे एक बेहतर अनुभव चाहते हैं।

उनके मुताबिक स्टेडियमों में आधुनिक एस्केलेटर, बेहतर फूड कोर्ट, साफ-सुथरे रेस्टोरेंट, पर्याप्त संख्या में हाई-क्वालिटी टॉयलेट और आसान एंट्री-एग्जिट सिस्टम होना चाहिए। उनका कहना है कि तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि स्टेडियमों को मौसम के अनुकूल और अधिक आरामदायक बनाया जा सकता है।

“मैच के अलावा भी कमाई का केंद्र बनें स्टेडियम”

Lalit Modi ने एक दिलचस्प सुझाव भी दिया। उनका मानना है कि क्रिकेट स्टेडियम सिर्फ मैच वाले दिनों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।

उन्होंने कहा कि आधुनिक स्टेडियमों को सालभर चलने वाले एंटरटेनमेंट हब में बदला जा सकता है। वहां शॉपिंग स्पेस, कॉन्सर्ट, कॉर्पोरेट इवेंट, फैमिली एंटरटेनमेंट जोन और अन्य गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं। इससे स्टेडियमों की आय बढ़ेगी और दर्शकों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

दर्शकों की परेशानियों पर उठाए सवाल

कई क्रिकेट प्रशंसकों ने भी वर्षों से स्टेडियमों में लंबी कतारों, पार्किंग समस्याओं, सीमित खाने-पीने की सुविधाओं और साफ-सफाई को लेकर शिकायतें की हैं।

Modi का कहना है कि जब एक परिवार बच्चों के साथ 4-5 घंटे स्टेडियम में बिताता है, तो उन्हें साफ-सुथरा वातावरण, बेहतर भोजन और आरामदायक सुविधाएं मिलनी चाहिए। यही अनुभव दर्शकों को बार-बार स्टेडियम तक खींचकर लाता है।

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भारतीय क्रिकेट के पास पैसों की कमी नहीं

पूर्व IPL प्रमुख का तर्क है कि भारतीय क्रिकेट दुनिया के सबसे अमीर खेल इकोसिस्टम में से एक है। मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से बड़ी कमाई होती है, लेकिन उसका पर्याप्त हिस्सा स्टेडियमों के आधुनिकीकरण पर खर्च नहीं किया जाता।

उनका सुझाव है कि क्रिकेट से होने वाली केंद्रीय आय का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर लगाया जाना चाहिए ताकि आने वाले वर्षों में भारत के स्टेडियम वैश्विक स्तर पर उदाहरण बन सकें।

बहस सिर्फ स्टेडियम की नहीं, भविष्य की भी है

Lalit Modi के बयान पर राय अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोग इसे अतिशयोक्ति मान रहे हैं, जबकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय क्रिकेट की बढ़ती आर्थिक ताकत के साथ दर्शकों को मिलने वाली सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव आना चाहिए।

फिलहाल सवाल यही है कि क्या भविष्य में भारतीय क्रिकेट सिर्फ मैदान के अंदर शानदार प्रदर्शन के लिए जाना जाएगा, या फिर स्टेडियम के बाहर और अंदर मिलने वाले विश्वस्तरीय अनुभव के लिए भी पहचान बनाएगा?

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