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Court ने मुझे लगभग दोषी घोषित कर दिया Kejriwal का Delhi High Court में सीधा टकराव, Judge Sharma को हटाने की माँग पर आज फैसला
Liquor Policy Case में Trial Court से discharge मिली, CBI ने High Court में challenge किया — अब Arvind Kejriwal खुद कोर्ट में पेश होकर Justice Swarana Kanta Sharma की recusal माँग रहे हैं। आज 4:30 बजे verdict।
कभी-कभी कानून की लड़ाई में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होता कि मुकदमा क्या है — बल्कि यह होता है कि मुकदमे की सुनवाई कौन करे। Delhi High Court में आज ठीक यही सवाल केंद्र में है।
AAP के convener और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने Justice Swarana Kanta Sharma की recusal यानी मामले से हटने की माँग की है। आज शाम 4:30 बजे इस पर verdict आना है।
पूरा मामला क्या है?
February 27, 2026 को एक Trial Court ने Liquor Policy Case में Kejriwal सहित 23 आरोपियों को discharge कर दिया — यानी कह दिया कि CBI के chargesheets में इनके खिलाफ “grave suspicion” पैदा करने वाले सबूत नहीं हैं।
CBI ने इस आदेश को तुरंत Delhi High Court में challenge किया। मामला Justice Swarana Kanta Sharma के पास आया। March 9 को Justice Sharma ने CBI की petition पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि Trial Court का discharge order “prima facie erroneous” — यानी प्रथम दृष्टया गलत — लगता है।
इसके बाद Kejriwal ने recusal plea दाखिल की।
Kejriwal ने दिए 10 कारण — “Court ने मुझे दोषी घोषित कर दिया”
April 13 को Kejriwal खुद कोर्ट में पेश हुए — वकील नहीं, खुद। करीब एक घंटे तक उन्होंने अपना पक्ष रखा। उन्होंने 10 specific grounds बताए कि Justice Sharma को यह मामला क्यों नहीं सुनना चाहिए।
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उनका कहना था — “जब Justice Sharma ने मेरी bail और arrest को challenge पर फैसला दिया था, वो orders इतने conclusive थे कि लगा court ने मुझे लगभग दोषी घोषित कर दिया।”
Kejriwal ने यह भी कहा कि Justice Sharma ने Manish Sisodia और K Kavitha की bail pleas में भी relief देने से इनकार किया था — और इससे bias की perception बनती है।

उनकी दलील थी — judge का deep involvement और पहले के conclusive findings मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ fair hearing की उम्मीद नहीं रह जाती।
CBI का पलटवार — Solicitor General Tushar Mehta की दो टूक
Solicitor General Tushar Mehta ने CBI की तरफ से पेश होकर recusal plea को सिरे से खारिज किया। उन्होंने Justice Sharma से अनुरोध किया कि वो Kejriwal के खिलाफ contempt action शुरू करें।
Mehta ने कहा — “अगर जज हर बार किसी की नाखुशी पर recuse होने लगे, तो litigants को judge चुनने का veto power मिल जाएगा। यह न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है।”
उन्होंने इस plea को “forum shopping” करार दिया — यानी अपने मन का judge पाने की कोशिश।
Judge की दिलचस्प टिप्पणी
पाँच घंटे की सुनवाई के बाद Justice Sharma ने Kejriwal को एक unusual compliment दिया — “आपने अच्छे arguments दिए। आप वकील की practice कर सकते हैं।” इस पर कोर्ट रूम में हलकी हँसी भी गूँजी।
लेकिन इसके बावजूद उन्होंने verdict reserve कर लिया।
AAP का रुख — “हमारा जवाब record क्यों नहीं होता?”
AAP ने एक statement में कहा — “Kejriwal ने CBI के affidavit का जवाब file किया है, लेकिन उसे record पर नहीं लिया जा रहा। बार-बार हमारे responses ignore क्यों किए जाते हैं?”
सोमवार को Kejriwal video conferencing के ज़रिए virtually पेश हुए और माँग की कि उनका rejoinder record पर लिया जाए। Justice Sharma ने कहा कि वो “going out of her way” है इसे written submission के तौर पर accept करने में।
आज का verdict — एक gateway फैसला
आज का verdict सिर्फ recusal पर नहीं है — यह उस पूरे case का gateway है। अगर Justice Sharma recuse हो जाती हैं, तो CBI की petition नए judge के सामने जाएगी। अगर नहीं, तो सुनवाई तुरंत शुरू होगी — और 23 discharged लोगों का भविष्य तय होना शुरू होगा।
दोनों पक्ष Supreme Court में भी जा सकते हैं।
