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Politics

जम्मू में लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर बढ़ा विवाद, BJYM का बड़ा आंदोलन ऐलान

27 मार्च को ‘सेक्रेटेरिएट चलो’ मार्च, छात्रों की मांग को लेकर सियासत गरमाई

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जम्मू में लॉ यूनिवर्सिटी की मांग को लेकर BJYM ने 27 मार्च को प्रदर्शन का ऐलान किया

Jammu में लॉ यूनिवर्सिटी की मांग को लेकर अब राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। छात्रों की बढ़ती मांग के बीच Bharatiya Janata Yuva Morcha (BJYM) ने बड़ा कदम उठाते हुए 27 मार्च को “सेक्रेटेरिएट चलो” मार्च का ऐलान किया है।

यह प्रदर्शन उस दिन होगा, जब Jammu and Kashmir Legislative Assembly का बजट सत्र एक महीने के अंतराल के बाद दोबारा शुरू होगा।

क्या है पूरा मामला?

जम्मू में लंबे समय से एक नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) की मांग उठ रही है। छात्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में उच्च शिक्षा के बेहतर अवसरों की कमी है।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।

BJYM का बड़ा ऐलान

BJYM ने साफ किया है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • 27 मार्च को सिविल सेक्रेटेरिएट का घेराव
  • बड़े पैमाने पर युवाओं की भागीदारी
  • सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति

इस प्रदर्शन को लेकर तैयारियां भी तेज हो गई हैं।

सरकार पर लगे आरोप

Arun Prabhat ने Omar Abdullah की सरकार पर “क्षेत्रीय भेदभाव” का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि जम्मू क्षेत्र की लगातार अनदेखी की जा रही है, जबकि छात्रों की मांग पूरी तरह जायज है।

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पहले भी उठ चुका है विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब किसी उच्च शिक्षा संस्थान को लेकर जम्मू में विवाद हुआ हो। इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज और अन्य संस्थानों को लेकर ऐसे मुद्दे सामने आ चुके हैं।

लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर भी सरकार ने कहा था कि फिलहाल Budgam में एक अस्थायी व्यवस्था की गई है और स्थायी कैंपस बाद में तय किया जाएगा।

लेकिन यह जवाब छात्रों और स्थानीय लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाया।

छात्रों की क्या है मांग?

छात्रों का कहना है कि:

  • जम्मू में स्थायी लॉ यूनिवर्सिटी बनाई जाए
  • स्थानीय युवाओं को बेहतर शिक्षा का मौका मिले
  • क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाए

उनका मानना है कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।

आगे क्या?

अब सभी की नजरें 27 मार्च के प्रदर्शन पर टिकी हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या छात्रों की मांग पूरी होती है या नहीं।

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