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क्या ईरान ‘कामीकाज़े डॉल्फिन’ से करेगा हमला? अमेरिका ने अफवाहों पर दिया चौंकाने वाला जवाब
Pete Hegseth ने साफ किया—ईरान के पास ऐसी कोई क्षमता नहीं, लेकिन समुद्री जानवरों का सैन्य इस्तेमाल नई बात नहीं
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक अजीब लेकिन चौंकाने वाली खबर ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है—क्या Iran ‘कामीकाज़े डॉल्फिन’ का इस्तेमाल कर अमेरिकी जहाजों पर हमला कर सकता है?
यह सवाल तब उठा जब The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरानी अधिकारी “माइन ले जाने वाली डॉल्फिन” का इस्तेमाल करने की योजना बना सकते हैं। इसके बाद यह खबर तेजी से फैल गई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई।
अमेरिका ने क्या कहा?
इस मुद्दे पर जब अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान के पास इस तरह की कोई क्षमता नहीं है।
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हालांकि, उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह जरूर कहा कि वह यह “कन्फर्म या डिनाय” नहीं कर सकते कि अमेरिका के पास ‘कामीकाज़े डॉल्फिन’ हैं या नहीं। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी।
क्या वाकई डॉल्फिन का इस्तेमाल होता है?
यह सुनने में भले ही फिल्मी लगे, लेकिन समुद्री जानवरों का सैन्य इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। अमेरिका का एक पुराना प्रोग्राम है—US Marine Mammal Program—जिसमें डॉल्फिन और सी-लायन को ट्रेन किया जाता है।
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इनका काम हथियार बनना नहीं, बल्कि समुद्र के अंदर छिपी बारूदी सुरंगों (माइंस) को ढूंढना होता है। डॉल्फिन अपनी बेहद उन्नत सोनार क्षमता के कारण अंधेरे और गंदले पानी में भी चीजों का पता लगा सकती हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना तनाव का केंद्र
पूरा विवाद Strait of Hormuz को लेकर है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
हाल के दिनों में यहां बारूदी सुरंगों और सैन्य गतिविधियों के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कोई देश नई और असामान्य रणनीतियां अपना सकता है।
क्या ईरान के पास ऐसा कोई प्रोग्राम है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने साल 2000 के आसपास डॉल्फिन खरीदी थीं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वे अब इतनी पुरानी हो चुकी होंगी कि किसी सैन्य ऑपरेशन में इस्तेमाल नहीं की जा सकतीं।

इसके अलावा, अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि ईरान के पास सक्रिय रूप से कोई “डॉल्फिन वॉरफेयर” प्रोग्राम मौजूद है।
दूसरे देशों का इतिहास
यह सिर्फ अमेरिका ही नहीं है जो समुद्री जानवरों का इस्तेमाल करता है। Russia भी अपने बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए डॉल्फिन का इस्तेमाल कर चुका है।
हालांकि, इनका उपयोग मुख्य रूप से निगरानी और सुरक्षा के लिए होता है, न कि आत्मघाती हमलों के लिए।
अफवाह या रणनीतिक मनोवैज्ञानिक खेल?
विशेषज्ञों का मानना है कि “कामीकाज़े डॉल्फिन” जैसी खबरें अक्सर युद्ध के दौरान मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए भी फैलाई जाती हैं।
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CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका फिलहाल Strait of Hormuz को सुरक्षित बनाने के अपने मिशन में डॉल्फिन का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘कामीकाज़े डॉल्फिन’ की कहानी अभी ज्यादा अफवाह और कल्पना पर आधारित लगती है। हालांकि, यह जरूर सच है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक के साथ-साथ असामान्य तरीकों का भी इस्तेमाल होता रहा है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इस तरह की खबरें यह दिखाती हैं कि युद्ध सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि रणनीति और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का भी खेल है।
