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Account में थे सिर्फ ₹84, Bank के बाहर माथा टेकते थे Dhurandhar Actor Gaurav Gera की संघर्ष की कहानी रुला देगी

IIT Engineer पिता के बेटे ने Mumbai में बिना पैसों के पैदल चलकर सपना जिया — आज Dhurandhar में ‘Aalam Bhai’ बनकर देश का दिल जीत लिया।

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Account में ₹84, Bank को माथा टेकते थे Gaurav Gera — Dhurandhar Actor की संघर्ष की Real Story | Dainik Diary
Gaurav Gera — Dhurandhar में 'Aalam Bhai' के किरदार से देश का दिल जीतने वाले इस actor के संघर्ष की कहानी उतनी ही inspiring है जितना उनका अभिनय। (Photo: Instagram/GauravGera)

Mumbai — जब Gaurav Gera की film Dhurandhar देखते हुए आप Aalam Bhai के किरदार पर मोहित हो जाते हैं, तो शायद आपको अंदाजा भी नहीं होता कि इस actor की असली जिंदगी किसी filmy script से कम नहीं रही। एक ऐसा शख्स जिसके bank account में कभी सिर्फ 84 थे — और वो उस bank के सामने से गुजरते हुए मन ही मन कहता था, “मेरा ख्याल रखना।”

कोई filmy background नहीं, बस एक जुनून था

Gaurav Gera उन actors में से हैं जिन्होंने Bollywood में बिना किसी godfather के रास्ता बनाया। Jist के साथ एक बेबाक बातचीत में उन्होंने अपनी पूरी journey खोलकर रख दी —

“मेरे यहाँ कोई filmon में नहीं था। परिवार का कोई भी सदस्य films से जुड़ा नहीं था।”

बचपन में school के annual functions और fancy dress competitions से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे एक passion में बदलता गया। पढ़ाई में वो average थे — 72%, 80%, 82% — लेकिन art और craft में हमेशा A-plus आता था। उन्हें लगता था कि जिस चीज में वो अच्छे हैं, उसे कोई encourage ही नहीं कर रहा।

Pearl Academy of Fashion से Theatre तक का रास्ता

Sketching का शौक था तो College of Arts में apply किया, लेकिन दाखिला नहीं मिला। फिर fashion की राह पकड़ी और Pearl Academy of Fashion join कर ली। लेकिन जल्द ही एहसास हो गया कि यह उनकी मंजिल नहीं है —

“मैंने papa से बोल दिया — ‘पैसे बचा लो, बड़ा महँगा course है। मैं नहीं करूँगा।’ Papa ने कहा, ‘Finish it. आधे साल job कर लेना, फिर जो मन में आए करना।’ Exactly आधा साल job किया और फिर theatre join कर लिया।”

यह वो मोड़ था जिसने Gaurav Gera को Gaurav Gera बनाया।

84 का account और Bank को माथा टेकना

Mumbai आए, सपने लेकर आए — लेकिन जेब लगभग खाली थी। वो बताते हैं —

“मेरे account में 84 थे। मैं HDFC Bank के सामने से गुजरता था और bank को देखकर कहता था, ‘मेरा ख्याल रखना।’ मैं आते-जाते bank को माथा टेकके जाता था।”

यह सुनकर हँसी भी आती है और आँखें भी नम हो जाती हैं। Auto के पैसे नहीं होते थे तो पैदल चल देते थे — लेकिन हार नहीं मानते थे।

Papa के वो letters — “2,000 भेज रहा हूँ, इससे ज्यादा नहीं है”

Gaurav के पिता IIT-BHU से engineer थे — salaried person। घर में पैसों की कमी नहीं थी, लेकिन बेटे के सपने के लिए हर महीने जो कुछ हो सकता था, वो भेजते थे। और वो letters आज भी Gaurav के पास सँभाले हुए हैं —

“Papa के letters अभी भी मेरे पास हैं जहाँ लिखा होता था — ‘2,000 भेज रहा हूँ, इससे ज्यादा नहीं है।'”

एक पिता की यह सच्चाई — कि उसके पास इससे ज्यादा नहीं था — और फिर भी उसने बेटे का सपना नहीं तोड़ा — यही असली support है।

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खुद्दार इतने कि देने वाला बनना चाहते थे, लेने वाला नहीं

उस मुश्किल दौर को याद करते हुए Gaurav कहते हैं कि उन्होंने कभी खुद को बेचारा नहीं समझा —

“उस वक्त लगता था तकलीफ नहीं है। पैसे नहीं हैं auto के, तो पैदल आ जायेंगे। मैं थोड़ा खुद्दार type था। मैं देने वाला बनना चाहता था, लेने वाला नहीं।”

उन्होंने अपने परिवार को एक letter भी लिखा था उस दौर में —

“Letter में लिखा था कि अभी पैसे के front पर कुछ materialise नहीं हुआ है, लेकिन please have faith in me. Future is bright. I need to learn more।”

और आज उस letter को पढ़कर वो खुद कहते हैं — “उसमें न घमंड था, न यह था कि मुझे सब आता है। अगर आज मुझे वैसा बच्चा मिले, तो मैं उसको support ही करूँगा।”

Dhurandhar ने दी नई पहचान, लेकिन अहंकार नहीं आया

Account में ₹84, Bank को माथा टेकते थे Gaurav Gera — Dhurandhar Actor की संघर्ष की Real Story | Dainik Diary


Aditya Dhar की film Dhurandhar में Gaurav ने Mohammad Aalam — यानी ‘Aalam Bhai’ — का किरदार निभाया। एक Indian intelligence operative जो Karachi के Lyari इलाके में juice seller बनकर undercover काम करता है। यह role उन्हें नई पहचान दे गया।

लेकिन इस तारीफ ने उन्हें बदला नहीं। वो बताते हैं कि कुछ साल पहले एक phase जरूर आया था —

“कुछ सालों पहले मुझे लगने लगा था कि लोग मुझे ‘legend’ बोल रहे हैं और शायद मैंने उसको थोड़ा seriously ले लिया था। फिर मुझे लगा — ‘No, I have to break it. I have to kill it।'”

“Greatness वाली feeling अहंकार लाती है। मैं उस zone का नहीं होना चाहता था। इसलिए मैं अपने आप को check में रखता हूँ।”

Industry ने सिखाई सबसे बड़ी सीख

Gaurav Gera की यह पूरी कहानी एक सबक है — कि रास्ता मुश्किल हो सकता है, account में 84 हो सकते हैं, पैदल चलना पड़ सकता है — लेकिन अगर सपना साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो मंजिल मिलती है।

जैसा उन्होंने खुद कहा — “आज आप rocking हो, कल नहीं हो। मैंने इतने ups and downs देखे हैं कि अब फर्क नहीं पड़ता।”