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मां सिर्फ रिश्तों की नहीं, परिवार की सबसे बड़ी ‘इकोनॉमिक मैनेजर’ भी हैं: भारत में बदल रही महिलाओं की वित्तीय भूमिका
घरेलू जिम्मेदारियों से लेकर निवेश और बच्चों की पढ़ाई तक, आज की भारतीय माताएं परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं। फिर भी उनकी मेहनत का बड़ा हिस्सा अब भी ‘अनदेखा’ रह जाता है।
भारत में मां को हमेशा त्याग, प्यार और परिवार को जोड़कर रखने वाली शक्ति के रूप में देखा गया है। लेकिन अब समय बदल रहा है। आज की मां सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह परिवार की आर्थिक योजनाओं, बचत, निवेश और भविष्य की सुरक्षा में भी बड़ी भूमिका निभा रही है।
शहरी भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच महिलाएं अब सिर्फ खर्च चलाने वाली नहीं, बल्कि परिवार की ‘फाइनेंशियल प्लानर’ बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल इमरजेंसी, रिटायरमेंट और भविष्य की सेविंग्स जैसे फैसलों में माताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
दिलचस्प बात यह है कि कई महिलाएं नौकरी या बिजनेस के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं। वहीं करोड़ों गृहिणियां ऐसी हैं, जो बिना किसी सैलरी के पूरे घर का संचालन करती हैं। हालांकि, उनके इस योगदान को अक्सर आर्थिक नजरिए से नहीं देखा जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी परिवार में मां की भूमिका अचानक प्रभावित हो जाए, तो उसका असर केवल भावनात्मक नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी भारी पड़ सकता है। बच्चों की देखभाल, घरेलू प्रबंधन, बुजुर्गों की देखरेख और रोजमर्रा की व्यवस्था के लिए परिवार को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
हाल के वर्षों में महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता भी तेजी से बढ़ी है। अब महिलाएं सिर्फ कमाई को ही आर्थिक स्वतंत्रता नहीं मानतीं, बल्कि वे भविष्य की योजना, इमरजेंसी फंड और निवेश को भी उतना ही जरूरी समझने लगी हैं। हालांकि, कई महिलाएं अब भी यह मानती हैं कि उनके पास भविष्य के लिए पर्याप्त बचत नहीं है।
यही वजह है कि अब इंश्योरेंस और फाइनेंशियल सिक्योरिटी को लेकर सोच बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है। पहले जहां परिवार में केवल कमाने वाले सदस्य का बीमा प्राथमिकता होता था, वहीं अब महिलाओं और गृहिणियों के आर्थिक योगदान को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ कवर और रिटायरमेंट प्लान जैसी सुविधाएं महिलाओं के लिए बेहद जरूरी हैं। इससे न सिर्फ परिवार को सुरक्षा मिलती है, बल्कि महिलाओं को भी आर्थिक आत्मविश्वास मिलता है।

आज भारत में महिलाएं म्यूचुअल फंड, SIP, लॉन्ग टर्म सेविंग्स और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म्स की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। यह बदलाव केवल परिवारों को नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रहा है।
मदर्स डे पर केवल उपहार या सोशल मीडिया पोस्ट से आगे बढ़कर महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान पर भी ध्यान देना जरूरी है। क्योंकि मां सिर्फ परिवार को संभालती नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक नींव को भी मजबूत बनाती है।
