Politics
Ajit Pawar Networth: सत्ता में नहीं रहे Ajit Pawar, फिर भी पीछे छोड़ गए करोड़ों की संपत्ति
महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज अजित पवार के निधन के बाद उनकी नेटवर्थ और संपत्ति को लेकर सामने आई अहम जानकारियां
महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहे वरिष्ठ नेता अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे। 66 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद जहां राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है, वहीं लोगों के बीच उनकी नेटवर्थ और संपत्ति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
अजित पवार को हमेशा एक तेज-तर्रार और रणनीतिक राजनीति करने वाले नेता के तौर पर जाना गया। वह भले ही हाल के वर्षों में सत्ता के केंद्र में सक्रिय भूमिका में न रहे हों, लेकिन इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रही।
कितनी थी Ajit Pawar की कुल संपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स और चुनावी हलफनामों के अनुसार, अजित पवार के पास कुल करीब 124 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बताई जाती है। इसमें चल-अचल संपत्ति, कृषि भूमि, आवासीय संपत्ति और निवेश शामिल हैं। राजनीति में लंबा समय बिताने के दौरान उनकी संपत्ति में लगातार इजाफा देखा गया।
और भी पढ़ें : Border 2 के बाद Ahan Shetty की Net Worth 2026 में जानिए कितनी बढ़ गई
कृषि भूमि और रियल एस्टेट में निवेश
अजित पवार की संपत्ति का बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में मौजूद कृषि भूमि से जुड़ा रहा। इसके अलावा पुणे और आसपास के इलाकों में उनके नाम पर कई रियल एस्टेट निवेश भी बताए जाते हैं। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने जमीन और प्रॉपर्टी में समझदारी से निवेश किया।

राजनीति से दूरी, लेकिन आर्थिक मजबूती कायम
हाल के वर्षों में जब अजित पवार सक्रिय राजनीति से थोड़ा पीछे हटे, तब भी उनकी आर्थिक स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ा। जानकारों का मानना है कि पहले किए गए निवेश और पारिवारिक संपत्तियों के कारण उनकी नेटवर्थ स्थिर बनी रही।
निधन के बाद उठे कई सवाल
अजित पवार के निधन के बाद अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि उनकी संपत्ति का उत्तराधिकार किसे मिलेगा और इसका राजनीतिक व पारिवारिक असर क्या होगा। फिलहाल परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अजित पवार का जाना सिर्फ एक राजनीतिक शख्सियत का अंत नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक लंबे अध्याय का समापन भी माना जा रहा है। उनकी संपत्ति और जीवनशैली इस बात की गवाही देती है कि सत्ता में न रहते हुए भी उनका प्रभाव और विरासत कायम रही।
