World News
Trump की टीम को बड़ा डर अगले 5 साल में ताइवान पर हमला कर सकता है चीन
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद अमेरिकी सलाहकारों की चिंता बढ़ी, रिपोर्ट में चीन के इरादों को लेकर बड़ा दावा।
अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक को भले ही कूटनीतिक सफलता के तौर पर पेश किया गया हो, लेकिन अंदरखाने माहौल कुछ और ही बताया जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के करीबी सलाहकारों को डर है कि आने वाले पांच वर्षों में चीन ताइवान के खिलाफ बड़ा कदम उठा सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच हुई हालिया बातचीत के बाद अमेरिकी प्रशासन के भीतर चिंता और बढ़ गई है।
क्या है अमेरिकी सलाहकारों की सबसे बड़ी चिंता?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के कुछ वरिष्ठ सलाहकारों का मानना है कि चीन अब खुद को सिर्फ “उभरती ताकत” नहीं बल्कि अमेरिका के बराबर की वैश्विक शक्ति मानने लगा है।
एक सलाहकार ने कथित तौर पर कहा कि चीन दुनिया को यह संदेश देना चाहता है — “हम अब उभरती शक्ति नहीं हैं, हम आपके बराबर हैं और ताइवान हमारा है।”
और भी पढ़ें : Trump ने क्यों रुकवाई ईरान-अमेरिका टकराव की आग? पाकिस्तान का नाम लेकर दिया बड़ा बयान
यही बयान अब अमेरिका की रणनीतिक चिंताओं का केंद्र बन गया है।
ताइवान क्यों है इतना बड़ा मुद्दा?
Taiwan लंबे समय से चीन और अमेरिका के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजहों में से एक रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र लोकतांत्रिक शासन वाला क्षेत्र मानता है।

China Taiwan Tension News: ट्रंप के सलाहकारों को अगले 5 साल में चीन के हमले का डर
अमेरिका आधिकारिक तौर पर One China Policy को मानता जरूर है, लेकिन वह ताइवान को सैन्य और राजनीतिक समर्थन भी देता रहा है। यही कारण है कि ताइवान को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच लगातार तनाव बना रहता है।
ट्रंप-शी बैठक के बाद क्यों बढ़ी बेचैनी?
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात का माहौल सार्वजनिक रूप से काफी सकारात्मक दिखाया गया। दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत की।
लेकिन अमेरिकी अधिकारियों को लगता है कि चीन इस नरम माहौल का फायदा उठाकर अपनी सैन्य और भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ताइवान के आसपास लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है। हाल के वर्षों में चीनी लड़ाकू विमान और नौसेना की गतिविधियां ताइवान के पास तेजी से बढ़ी हैं।
अगर हमला हुआ तो क्या होगा?
अगर चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो इसका असर सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी सप्लाई और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ताइवान दुनिया की सबसे बड़ी semiconductor इंडस्ट्री का केंद्र माना जाता है। यहां बनने वाली चिप्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन, AI सिस्टम, कारों और सैन्य उपकरणों तक में होता है।
ऐसे में किसी भी संघर्ष से वैश्विक टेक बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।
दुनिया की नजर अब एशिया पर
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अमेरिका, चीन और ताइवान के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
फिलहाल अमेरिका और चीन दोनों खुलकर किसी सैन्य टकराव की बात नहीं कर रहे, लेकिन बंद कमरों में बढ़ती चिंताओं ने दुनिया की नजर एक बार फिर ताइवान पर टिका दी है।
