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चलते-चलते फिटनेस का राज: Kriti Sanon ने बताया क्यों जिम नहीं, ‘वॉकिंग’ है उनकी सबसे बड़ी आदत
35 साल की एक्ट्रेस ने खोला फिटनेस का सीक्रेट—“जब तक लक्ष्य न हो, मैं जिम नहीं जाती”
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने हाल ही में अपनी फिटनेस जर्नी को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। जहां आजकल ज्यादातर लोग घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, वहीं कृति का फिट रहने का तरीका थोड़ा अलग और बेहद आसान है।
एक बातचीत के दौरान, जो Amazon MX Player पर प्रसारित शो “Famously Fit with Sophie” में हुई, कृति ने बताया कि उनकी सबसे पुरानी आदत “walking and talking” है।
फोन उठाते ही शुरू हो जाती है वॉक
कृति ने मुस्कुराते हुए बताया, “मेरी एक आदत है—जैसे ही मैं फोन उठाती हूं, मैं चलना शुरू कर देती हूं। कई बार तो मेरे पैरेंट्स को कहना पड़ता है कि बैठ जाओ!”
यह छोटी सी आदत उनके डेली रूटीन का हिस्सा बन चुकी है, जो उन्हें बिना किसी भारी-भरकम एक्सरसाइज के भी एक्टिव बनाए रखती है।
दिल्ली में कभी जिम नहीं गईं
दिल्ली में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कृति ने कहा कि वह उस समय कभी जिम नहीं जाती थीं।
“मुझे हमेशा एक लक्ष्य चाहिए होता है। जब तक मुझे किसी खास रोल या लुक के लिए तैयारी नहीं करनी होती, तब तक मैं खुद को जिम जाने के लिए मोटिवेट नहीं कर पाती,” उन्होंने खुलासा किया।
‘राब्ता’ ने बदली फिटनेस सोच
कृति ने बताया कि फिल्म राब्ता के दौरान उनकी फिटनेस को लेकर सोच पूरी तरह बदल गई।
“उस फिल्म में मुझे एक खास लुक चाहिए था। उसी समय मैंने पहली बार सीरियसली वर्कआउट करना शुरू किया। तब मुझे समझ आया कि मेरे शरीर के लिए क्या सही है और क्या नहीं,” उन्होंने कहा।

फिटनेस का नया फंडा: नेचुरल रहो
कृति का मानना है कि फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि हर कोई जिम जाए। सबसे जरूरी है कि आप अपने शरीर के हिसाब से एक ऐसा तरीका चुनें जो आपकी लाइफस्टाइल में फिट बैठता हो।
उनका यह भी कहना है कि फिटनेस को बोझ नहीं, बल्कि एक आदत बनाना चाहिए—जैसे चलना, हल्की एक्टिविटी करना या रोजमर्रा के कामों में एक्टिव रहना।
युवाओं के लिए क्या है सीख?
आज के युवाओं के लिए कृति का यह मैसेज काफी अहम है। हर किसी के लिए एक ही फिटनेस फॉर्मूला काम नहीं करता।
अगर आप जिम नहीं जा पा रहे हैं, तो भी निराश होने की जरूरत नहीं—आप छोटी-छोटी आदतों से भी खुद को फिट रख सकते हैं।
कृति सेनन की यह सोच बताती है कि फिटनेस का असली मतलब है—अपने शरीर को समझना और उसे उसी तरीके से एक्टिव रखना जो आपके लिए सहज हो।
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