Connect with us

International News

सोशल मीडिया के ज़माने की पहली अमेरिकी जंग — लेकिन ईरान से सच्चाई क्यों नहीं आ रही? 9 करोड़ लोग अँधेरे में हैं

ईरान में इंटरनेट 1% पर — बम गिरने की तस्वीर share करना अपराध, पेंटागन मीडिया को जवाब नहीं दे रहा, AI-generated फोटो वायरल हो रहीं; यह जंग “Black Box” बन गई है।

Published

on

ईरान जंग — सोशल मीडिया के ज़माने में भी सच क्यों छुपा है? 9 करोड़ लोग अँधेरे में | Dainik Diary

नई दिल्ली/तेहरान/वाशिंगटन। आज से करीब 50 साल पहले जब अमेरिका वियतनाम में जंग लड़ रहा था, तो दुनियाभर के पत्रकार उस युद्धक्षेत्र में घूम रहे थे। वहाँ से तस्वीरें आती थीं, वीडियो आते थे, सच्चाई सामने आती थी। उन्हीं तस्वीरों ने अमेरिका में जंग के खिलाफ इतना बड़ा जनआंदोलन खड़ा कर दिया कि सरकार को झुकना पड़ा।

2026 में जब अमेरिका-इज़राइल ने ईरान पर जंग छेड़ी — तो दुनिया ने सोचा: अब तो सोशल मीडिया का ज़माना है। हर हाथ में स्मार्टफोन है। सच तुरंत सामने आ जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

यह जंग अब तक की सबसे बड़ी “Information Black Box” बन गई है।

ईरान में इंटरनेट — 1% पर सिमटी दुनिया

28 फरवरी 2026 को जैसे ही अमेरिका-इज़राइल के हमले शुरू हुए, ईरान सरकार ने एक “Kill Switch” दबाया — और देश की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट connectivity लगभग पूरी तरह काट दी। NetBlocks के अनुसार connectivity सामान्य स्तर के मात्र 1% पर आ गई।

और भी पढ़ें  : LPG की किल्लत पर सरकार ने कहा “चिंता है, लेकिन घबराएं नहीं”, दो जहाज़ Strait of Hormuz पार कर भारत की ओर रवाना

280 घंटे से ज़्यादा समय तक 9 करोड़ ईरानी नागरिक इस डिजिटल चुप्पी में रहे। ईरानी अधिकारियों ने साफ कह दिया — बम गिरने की जगहों की तस्वीरें share करना या VPN का इस्तेमाल करना “दुश्मन के साथ सहयोग” का अपराध है।

जरा सोचिए — आपके शहर पर बम गिरे और आप किसी को बता भी नहीं सकते।

पेंटागन का “Black Box”

दूसरी तरफ अमेरिका में भी पारदर्शिता की कमी है।

पेंटागन को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों ने बताया — “सामान्य युद्ध में हमें दिन में एक-दो बार विस्तृत briefing मिलती थी। अब वे बस कोई Random Tweet या वीडियो डाल देते हैं — जिस पर हम कोई सवाल नहीं पूछ सकते।”

रक्षामंत्री Pete Hegseth — जो खुद एक TV एंकर रहे हैं — मीडिया को डाँटते रहते हैं कि वे जंग की “सकारात्मक” खबरें क्यों नहीं दिखाते। लेकिन जब पत्रकार असली सवाल पूछते हैं — कितने नागरिक मारे गए? कौन-से लक्ष्य थे? — तो जवाब नहीं मिलता।

यह ठीक वैसा ही है जैसे IPL मैच हो लेकिन स्कोरबोर्ड बंद हो — और commentator सिर्फ यही बोलता रहे कि “हम जीत रहे हैं।”

AI की तस्वीरें — असली या नकली?

यह अमेरिका का पहला बड़ा सैन्य संघर्ष है जो सोशल मीडिया के दौर में हो रहा है। लेकिन विडंबना यह है कि इसी कारण सच्चाई और झूठ में फर्क करना सबसे मुश्किल हो गया है।

ईरान जंग — सोशल मीडिया के ज़माने में भी सच क्यों छुपा है? 9 करोड़ लोग अँधेरे में | Dainik Diary


X (Twitter), Instagram और Telegram पर तेहरान की तबाही की सैकड़ों तस्वीरें वायरल हो रही हैं। लेकिन विशेषज्ञ बता रहे हैं कि इनमें से कई AI-generated हैं — बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली नकली तस्वीरें। कुछ पुराने युद्धों की तस्वीरें नए label के साथ share हो रही हैं।

साइबर जंग — प्रार्थना app हैक!

28 फरवरी को जैसे ही हमले शुरू हुए, इज़राइली hackers ने ईरान की एक मशहूर prayer app “BadeSaba Calendar” को हैक कर दिया — जिसके 50 लाख से ज़्यादा users थे। उनके फोन पर फारसी में messages आने लगे — “मदद आ गई है”, “हथियार डाल दो”, “आज़ादी का वक्त आ गया।”

सरकारी news sites defaced हो गईं। IRGC के communication systems बाधित हो गए। यह जंग सिर्फ आसमान में नहीं — स्मार्टफोन के अंदर भी लड़ी जा रही है।

इतिहास का सबक

वियतनाम में तस्वीरों ने जंग रोकी थी। 2003 में इराक जंग में embedded journalists ने अमेरिकी सरकार के पक्ष में खबरें लिखीं — और बाद में पछताए। 2026 में ईरान की जंग में न तस्वीरें आ रही हैं, न सवाल पूछे जा रहे हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक जंग लड़ रहा है — और उसके नागरिक “Black Box” में हैं।

— दैनिक डायरी न्यूज़ डेस्क

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *