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भारत–म्यांमार दाल समझौते का विस्तार: अगले 5 सालों में बढ़ेंगे ‘उड़द और तूर’ आयात

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट के बीच भारत ने म्यांमार के साथ अपने दाल आयात समझौते को 2025-26 के बाद पांच साल और बढ़ाने का निर्णय लिया

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भारत और म्यांमार के बीच उड़द और तूर दाल के आयात समझौते का विस्तार अगले पांच सालों तक लागू रहेगा। (Source: Pixabay)

नई दिल्ली: भारत ने म्यांमार के साथ अपने उड़द और तूर दाल आयात समझौते को 2025-26 के बाद अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब यूएस और इज़राइल का ईरान के साथ संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रहा है और ईंधन तथा उर्वरक सुरक्षा पर खतरे पैदा कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय ने उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को सूचित किया है कि म्यांमार के साथ मौजूदा एमओयू (MoU) को 2026-27 वित्तीय वर्ष से आगे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, भारत ने म्यांमार को अतिरिक्त 1 लाख टन तूर दाल की अनुमति देने पर भी विचार किया है, जो पहले से तय 1 लाख टन की मात्रा के अलावा होगी।

यह समझौता जून 2021 में हुआ था, जब भारत और म्यांमार ने उड़द और तूर दाल के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय, भारत ने प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन उड़द और 1 लाख टन तूर दाल म्यांमार से निजी व्यापार के माध्यम से आयात करने की प्रतिबद्धता जताई थी। समझौता म्यांमार के वाणिज्य मंत्रालय और भारत के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बीच हुआ था।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अचानक आने वाले संकटों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है। दालें भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं सभी के लिए लाभदायक साबित होगा।

इस विस्तार से न केवल भारत को भरोसेमंद स्रोत से दाल मिलती रहेगी, बल्कि यह आंतरिक बाजार में दाल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में भी मदद करेगा।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संकट के चलते भारत को ऐसे द्विपक्षीय समझौतों की ओर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

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