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तेहरान में 30 ठिकाने तबाह, खामेनेई का घर उड़ाया — ईरान का मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त, आसमान बंद
‘ऑपरेशन शील्ड ऑफ जूडा’ के तहत इज़राइल और अमेरिका ने एक साथ 30 ठिकानों पर हमला बोला — तेहरान, इस्फहान, करज और करमानशाह तक पहुंची तबाही।
शनिवार की सुबह तेहरान में लोग अभी अपनी नींद से जागे ही थे कि धमाकों की आवाज़ ने पूरे शहर को हिला दिया। सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर राजधानी के तीन इलाकों में एक साथ भीषण विस्फोट हुए। और फिर सुबह 10 बजे के बाद धमाकों की दूसरी लहर आई।
यह था ‘ऑपरेशन शील्ड ऑफ जूडा’ — महीनों की प्लानिंग, हफ्तों पहले तय की गई टाइमिंग और एक साथ 30 ठिकानों पर सटीक हमला।
एक साथ 30 ठिकाने — कोई बचा नहीं
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने खुद पुष्टि की कि इस ऑपरेशन में एक साथ 30 टारगेट को निशाना बनाया गया। इनमें सबसे बड़े निशाने थे — सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का निजी आवास और ईरानी इंटेलिजेंस का मुख्यालय।
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खामेनेई का घर ध्वस्त हो गया। लेकिन Reuters के मुताबिक वो उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे — उन्हें पहले ही किसी सुरक्षित जगह पहुंचा दिया गया था।
यह कुछ वैसा ही है जैसे 1991 की खाड़ी युद्ध में अमेरिका ने इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के महल को निशाना बनाया था — सद्दाम बच गए थे, महल नहीं। यहां भी खामेनेई बच गए, लेकिन उनका घर नहीं।
तेहरान से इस्फहान तक — हर तरफ धमाके
यह हमला सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं था। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक तेहरान के उत्तर और पूर्व के साथ-साथ इस्फहान, करज और करमानशाह में भी धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं।
यानी एक शहर नहीं — पूरे देश के कई हिस्सों में एक साथ हमले। यह बताता है कि इस ऑपरेशन की योजना कितनी बड़ी और कितनी सटीक थी।
मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त — देश अंधेरे में
अलजज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इज़राइली हमले में ईरान का मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह तबाह कर दिया गया। इसका मतलब यह है कि ईरान के लोग न तो एक-दूसरे से संपर्क कर पा रहे हैं, न ही दुनिया को बता पा रहे हैं कि वहां क्या हो रहा है।

सोचिए — अगर किसी शहर में अचानक सभी फोन बंद हो जाएं, इंटरनेट जाए, और ऊपर से बम गिर रहे हों। यही हाल था शनिवार को तेहरान का। यह सिर्फ सैन्य हमला नहीं था — यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध भी था।
आसमान बंद — ईरान का हवाई क्षेत्र सील
सिविल एविएशन ऑर्गेनाइज़ेशन ने पुष्टि की कि ईरान का पूरा हवाई क्षेत्र अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। नए NOTAM यानी नोटिस टू एयरमेन जारी होने के बाद यह फैसला लिया गया।
इसका असर सिर्फ ईरान पर नहीं — पूरे मध्य-पूर्व की हवाई यातायात व्यवस्था पर पड़ा। दुबई एयरपोर्ट पर पहले ही सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।
महीनों पहले बनी थी योजना
एक इज़राइली सुरक्षा अधिकारी ने Reuters को बताया कि इस ऑपरेशन की प्लानिंग महीनों पहले से चल रही थी। टाइमिंग कई हफ्ते पहले ही तय कर ली गई थी। हमले का मकसद था — इज़राइल के होम फ्रंट के लिए खतरा बनने वाले मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन बेस को तबाह करना।
यानी यह कोई जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला नहीं था। यह एक सोची-समझी, तैयार की गई सैन्य कार्रवाई थी — और इसका असर आने वाले कई दिनों तक महसूस किया जाएगा।
