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India क्यों फिर New Zealand से हारा Virat Kohli पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता और कमजोर गेंदबाज़ी बनी वजह
Gautam Gambhir के दौर में बढ़ती हारें टीम इंडिया की रणनीति पर उठे गंभीर सवाल
भारतीय क्रिकेट के लिए New Zealand अब सिर्फ एक मजबूत टीम नहीं, बल्कि एक असहज सच्चाई बन चुकी है। 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल, 2021 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल, 2024 की घरेलू टेस्ट सीरीज और अब 2026 की घरेलू वनडे सीरीज—हर बार कहानी एक जैसी रही है। इस बार भी जब कीवी टीम India पहुंची, शायद ही किसी ने सोचा था कि वह इतिहास रच देगी। लेकिन नतीजा वही पुराना निकला—India की हार और सवालों का अंबार।
वनडे सीरीज की शुरुआत Vadodara में India की जीत से हुई थी, लेकिन वही जीत अगर KL Rahul की संयम भरी पारी न होती तो हाथ से फिसल भी सकती थी। इसके बाद Rajkot और Indore में जो हुआ, उसने साफ कर दिया कि टीम मैनेजमेंट ने पिछले अनुभवों से बहुत कम सीखा है। Indore में 41 रन की हार के बाद हेड कोच Gautam Gambhir का चिंतित चेहरा काफी कुछ कह गया।
Virat Kohli पर फिर टिकी रही उम्मीद
तीनों मैचों में अगर किसी ने निरंतर प्रदर्शन किया तो वह थे Virat Kohli। 93, 23 और 124 रन की पारियों के साथ उन्होंने सीरीज में 240 रन बनाए। Indore में जब तक Kohli क्रीज़ पर थे, India को जीत की उम्मीद थी। लेकिन उनके आउट होते ही मुकाबला खत्म सा हो गया। सवाल यह नहीं कि Kohli ने क्या किया, बल्कि यह है कि बाकी बल्लेबाज़ों का योगदान कहां था?
कप्तान Shubman Gill से भविष्य की बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन इस सीरीज में वह अहम मौकों पर चूक गए। पहले दो वनडे में अर्धशतक के बाद विकेट फेंकना और निर्णायक मुकाबले में Kyle Jamieson की गेंद पर आउट होना—यह लापरवाही India को भारी पड़ी। वहीं Rohit Sharma भी पावरप्ले में Zakary Foulkes और Jamieson के सामने जूझते दिखे।
KL Rahul ने Rajkot में टीम को संभाला जरूर, लेकिन Indore में एक गैरज़रूरी शॉट खेलकर जल्दी आउट हो गए। Shreyas Iyer की भी निरंतरता नजर नहीं आई, हालांकि लंबे ब्रेक के बाद वापसी के चलते उन्हें समय दिया जा सकता है।
गेंदबाज़ी क्यों बनी सबसे बड़ी कमजोरी
बल्लेबाज़ी से भी बड़ी चिंता India की गेंदबाज़ी रही। Jasprit Bumrah की गैरमौजूदगी में पूरी जिम्मेदारी Kuldeep Yadav पर थी, लेकिन यह सीरीज उनके लिए भूलने लायक रही। इसका पूरा फायदा Daryl Mitchell ने उठाया, जिन्होंने तीन मैचों में 352 रन ठोक दिए।
सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि पहले दो मैचों में Arshdeep Singh को क्यों नहीं खिलाया गया। निर्णायक मुकाबले में उन्होंने पहली ही ओवर में Henry Nicholls को आउट कर दिखा दिया कि नई गेंद से विकेट कितने अहम होते हैं। वहीं Mohammed Siraj और Harshit Rana शुरुआती मैचों में प्रभाव नहीं छोड़ सके।

यहां चयनकर्ताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar से यह पूछा जाना लाज़मी है कि Mohammed Shami को अब तक क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि वह घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
ऑलराउंडर्स की दीवानगी पड़ रही भारी
India की ऑलराउंडर्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता भी नुकसानदेह साबित हुई। Nitish Reddy ने Indore में अर्धशतक जरूर लगाया, लेकिन गेंदबाज़ी में वह प्रभावी नहीं रहे। उन्हें Hardik Pandya जैसा विकल्प मानना जल्दबाज़ी होगी। अगर Reddy को टीम में रखना है तो या तो उन्हें स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के तौर पर खिलाया जाए, या फिर एक वास्तविक ऑलराउंडर की तलाश की जाए।
अब आत्ममंथन जरूरी
यह द्विपक्षीय सीरीज हार शायद तुरंत कोई बड़ा बदलाव न लाए, लेकिन Gambhir खुद कह चुके हैं कि जब सीरीज हार जाए, तो व्यक्तिगत रिकॉर्ड मायने नहीं रखते। उनके पूर्ववर्ती कोच Ravi Shastri और Rahul Dravid के दौर में भी प्रयोग हुए, लेकिन हारें इतनी लगातार नहीं थीं। Gambhir के कार्यकाल में यह सूची लंबी होती जा रही है।
अगर India को फिर से अपनी पुरानी धार लौटानी है, तो Virat Kohli पर निर्भरता कम करनी होगी और गेंदबाज़ी को फिर से आक्रामक बनाना होगा। नहीं तो New Zealand जैसी टीमें बार-बार India की कमजोरियों को उजागर करती रहेंगी।
