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शनिवार की सुबह ही क्यों चुनी गई ईरान पर हमले के लिए? — जवाब जानकर हैरान रह जाएंगे आप

इज़राइली खुफिया तंत्र ने पकड़ी खामेनेई की मीटिंग की खबर — और बस, हमले की टाइमिंग बदल दी गई। यह ऑपरेशन प्लानिंग नहीं, परफेक्शन था।

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इज़राइली खुफिया तंत्र ने खामेनेई की सुबह की मीटिंग की भनक लगाई और हमले की टाइमिंग बदल दी — सैटेलाइट तस्वीरों ने पुष्टि की कि तेहरान का हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड पूरी तरह तबाह।

दुनिया के सबसे बड़े सैन्य ऑपरेशनों में टाइमिंग सब कुछ होती है। एक घंटे की देरी जीत को हार में बदल सकती है। और एक घंटे की जल्दी इतिहास बदल सकती है।

शनिवार की सुबह इज़राइल और अमेरिका ने जो किया — वो सिर्फ हमला नहीं था। वो एक ऐसी शतरंज की चाल थी जो महीनों की प्लानिंग और आखिरी वक्त की इंटेलिजेंस से तैयार हुई थी।

खामेनेई की मीटिंग ने बदल दी हमले की टाइमिंग

Reuters ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और इज़राइल का यह ऑपरेशन तब शुरू हुआ जब यह पुष्टि हुई कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे हैं।

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असल में खामेनेई की यह बैठक शनिवार की शाम होनी थी। और हमला भी उसी हिसाब से शाम के लिए प्लान था।

लेकिन इज़राइली खुफिया तंत्र ने भनक लगाई कि बैठक शाम से बदलकर सुबह हो गई है।

बस — हमले की टाइमिंग भी बदल दी गई। शाम की जगह सुबह।

क्यों ज़रूरी था खामेनेई को पहले निशाना बनाना?

अमेरिकी अधिकारी ने Reuters को बताया — खामेनेई को सबसे पहले निशाना बनाना इसलिए ज़रूरी था ताकि “सरप्राइज़ का तत्व” बना रहे।

अगर हमला पहले किसी और ठिकाने पर होता और खामेनेई को भनक लग जाती — तो वो तुरंत किसी सुरक्षित बंकर में चले जाते। और फिर उन्हें ढूंढना नामुमकिन हो जाता।

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यह कुछ वैसा ही है जैसे 2011 में अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद वाले ठिकाने पर हमला किया था। तब भी CIA ने महीनों तक उनकी हर हरकत पर नज़र रखी और जब पक्का हो गया कि वो वहीं हैं — तभी ऑपरेशन शुरू किया। यहां भी यही तरीका अपनाया गया — लेकिन इस बार फैसला कुछ ही घंटों में लेना पड़ा।

सैटेलाइट तस्वीरों ने की पुष्टि

हमले के बाद सैटेलाइट इमेजरी ने पुष्टि की कि तेहरान में खामेनेई का हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड पूरी तरह तबाह हो चुका है। यह वो जगह थी जहां ईरान के 46 साल के शिया-धर्मतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी सत्ता केंद्रित थी।

एक सैटेलाइट तस्वीर ने वो काम किया जो हज़ार शब्द नहीं कर सकते — उसने बता दिया कि जो था, अब नहीं रहा।

46 साल के शासन का अंत — एक सुबह में

1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति हुई। तब से ईरान एक शिया धर्मतांत्रिक राज्य रहा है। खुमैनी के बाद खामेनेई ने 1989 से यह सत्ता संभाली। 35 साल से ज़्यादा वक्त तक उन्होंने ईरान की हर बड़ी नीति तय की।

और यह सब एक शनिवार की सुबह — कुछ ही मिनटों में — बदल गया।

इतिहास में कभी-कभी दशकों की व्यवस्था एक पल में ढह जाती है। रोम एक दिन में नहीं बना था — लेकिन वो एक दिन में गिरा ज़रूर था।

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