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“यह एक प्रक्रिया है” — भारत के रूसी तेल आयात पर ट्रंप का नया दावा, बोले “मोदी ने दिया भरोसा”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत धीरे-धीरे रूसी तेल आयात कम करेगा; भारत ने समझौते से किया इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के रूसी तेल आयात को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से यह आश्वासन मिला है कि भारत धीरे-धीरे रूस से तेल खरीद कम करेगा। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट कहा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ और देश की ऊर्जा नीति “जनता के हित और स्थिर कीमतों” को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा,
“भारत ने मुझे बताया है कि वे इसे रोकने वाले हैं… यह एक प्रक्रिया है। आप अचानक से खरीद बंद नहीं कर सकते। साल के अंत तक यह खरीद लगभग 40 प्रतिशत तक घट जाएगी। मोदी बहुत सहयोगी हैं, मैंने कल ही उनसे बात की थी।”
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ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच ऊर्जा सहयोग पर चर्चा तेज कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें से 25% शुल्क भारत के रूसी कच्चे तेल आयात से संबंधित बताया गया है।
भारत का दो-टूक जवाब — “हमारी प्राथमिकता उपभोक्ता हित”
भारत ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि देश की ऊर्जा नीति पूरी तरह स्वायत्त है और इसका उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं के लिए “स्थिर कीमतें” और “सुरक्षित आपूर्ति” सुनिश्चित करना है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “भारत किसी भी देश से व्यापारिक समझौते दबाव में नहीं करता। हमारा निर्णय केवल घरेलू आवश्यकता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित होता है।”

ट्रंप की नई रणनीति — चीन और रूस के बीच मध्यस्थता की कोशिश
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इसी बातचीत के दौरान अपने आगामी शी जिनपिंग से मिलने की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे इस बैठक का उपयोग रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं।
“मुझे लगता है कि शी बहुत व्यावहारिक नेता हैं। अगर हम साथ बैठें, तो रूस-यूक्रेन में शांति स्थापित की जा सकती है,” ट्रंप ने कहा।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान 2026 के अमेरिकी चुनाव से पहले “ग्लोबल डिप्लोमेसी” में उनकी सक्रियता दिखाने की कोशिश है। वहीं भारत, जो पहले से OPEC और रूस दोनों से सस्ते तेल आयात पर निर्भर है, किसी भी दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं दिख रहा।
भारत का ऊर्जा मंत्रालय लगातार यह दोहराता रहा है कि “भारत अपने नागरिकों के लिए सस्ती और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर दिशा में काम कर रहा है — चाहे वह अमेरिका हो या रूस।”
ट्रंप की ‘टैरिफ पॉलिटिक्स’
ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में चीन और भारत दोनों पर टैरिफ का दबाव बढ़ाया है। चीन के उत्पादों पर 155% टैरिफ की धमकी देने के बाद अब भारत पर भी अमेरिकी नीति कठोर हो रही है। हालांकि ट्रंप का यह रुख अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि भारत अमेरिकी निर्यात के लिए एक बड़ा बाज़ार है।
निष्कर्ष
जहां ट्रंप अपने बयानों से वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल पैदा कर रहे हैं, वहीं भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा केवल भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार का भविष्य भी तय करेगा।
