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सिर्फ 4 घंटे पढ़ाई, Netflix और क्रिकेट भी… फिर भी 99.25% अंक! जानिए लखनऊ के टॉपर सिद्धार्थ की सफलता का राज
12वीं में शानदार अंक लाने वाले सिद्धार्थ ने बताया कैसे बिना तनाव के पढ़ाई, खेल और ब्रेक्स ने उन्हें बनाया टॉपर।
आज के समय में बोर्ड एग्जाम का नाम सुनते ही ज्यादातर छात्रों और अभिभावकों के मन में तनाव शुरू हो जाता है। कई लोग मानते हैं कि अच्छे नंबर लाने के लिए दिन-रात पढ़ाई करना जरूरी है। लेकिन लखनऊ के रहने वाले सिद्धार्थ ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।
CISCE बोर्ड के इस छात्र ने 12वीं में शानदार 99.25% अंक हासिल किए, लेकिन उनकी सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने कभी 12-15 घंटे पढ़ाई नहीं की। सिद्धार्थ ने बताया कि वह रोज सिर्फ 3 से 4 घंटे ही पढ़ते थे और बाकी समय खुद को रिलैक्स रखने में बिताते थे।
लंबी पढ़ाई नहीं, नियमित पढ़ाई बनी सफलता की चाबी
एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने कहा कि उन्होंने खुद को कभी जरूरत से ज्यादा थकाया नहीं। उनका मानना था कि कम समय में फोकस के साथ पढ़ाई करना ज्यादा जरूरी है।
उन्होंने एक सिंपल और बैलेंस्ड रूटीन फॉलो किया, जिससे पढ़ाई बोझ नहीं लगी। सिद्धार्थ की यह सोच आज उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन रही है जो घंटों पढ़ाई करने के दबाव में रहते हैं।
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Netflix देखकर करते थे रिलैक्स
सिद्धार्थ ने बताया कि पढ़ाई के बीच वह खुद को फ्रेश रखने के लिए Netflix पर अपने पसंदीदा शोज भी देखते थे। वह रोज करीब 1 से 2 घंटे मनोरंजन के लिए निकालते थे।
उनका कहना है कि लगातार पढ़ाई करने से दिमाग थक जाता है। ऐसे में थोड़ा ब्रेक लेना जरूरी होता है ताकि दोबारा अच्छे फोकस के साथ पढ़ाई की जा सके।
क्रिकेट भी खेला, स्कूल टीम के वाइस-कैप्टन भी रहे
सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, सिद्धार्थ खेलों में भी काफी एक्टिव रहे। वह अपने स्कूल की क्रिकेट टीम के Vice-Captain थे।
उनका मानना है कि खेल बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और तनाव कम करने में मदद करते हैं। यही वजह रही कि पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा।
आज कई एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ फिजिकल एक्टिविटी बेहद जरूरी है।

सोशल मीडिया से बनाई दूरी
जहां ज्यादातर छात्र घंटों Instagram और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताते हैं, वहीं सिद्धार्थ ने खुद पर कंट्रोल रखना सीखा।
उन्होंने सोशल मीडिया को पूरी तरह बंद नहीं किया, लेकिन जरूरत पड़ने पर उससे दूरी बनाई। उनका कहना है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम ध्यान भटका सकता है और पढ़ाई पर असर डाल सकता है।
तनाव होने पर माता-पिता और टीचर्स से करते थे बात
सिद्धार्थ की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान भी रहा। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें तनाव महसूस होता था, वह अपने माता-पिता और टीचर्स से खुलकर बात करते थे।
उनके घर में कभी जरूरत से ज्यादा दबाव का माहौल नहीं बनाया गया। यही वजह रही कि वह आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर सके।
विशेषज्ञ भी कहते हैं कि बच्चों को डांटने या डराने के बजाय सपोर्ट करना ज्यादा जरूरी है।
अच्छे दोस्तों का भी बड़ा रोल
सिद्धार्थ ने यह भी बताया कि उनके दोस्त पढ़ाई को लेकर काफी पॉजिटिव थे। उनके एक करीबी दोस्त ने 99.75% अंक हासिल किए और अब दोनों CLAT की तैयारी कर रहे हैं।
यह कहानी बताती है कि सही दोस्त और अच्छा माहौल बच्चों को आगे बढ़ने में काफी मदद करता है।
माता-पिता के लिए सीख
सिद्धार्थ की कहानी सिर्फ एक टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन अभिभावकों के लिए भी बड़ा संदेश है जो बच्चों पर जरूरत से ज्यादा पढ़ाई का दबाव डालते हैं।
उनकी सफलता यह साबित करती है कि बच्चों को मानसिक शांति, सपोर्ट और बैलेंस्ड लाइफ मिले तो वह बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
हर बच्चा अलग होता है। किसी को ज्यादा समय लग सकता है तो कोई कम समय में बेहतर तैयारी कर सकता है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि पढ़ाई तनाव नहीं, सीखने का जरिया बने।
