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“22 लाख छात्रों के सपनों से खिलवाड़”: NEET पेपर लीक पर भड़के कमल हासन, बोले- छात्रों को ‘एग्जाम माफिया’ से बचाइए
NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में गुस्सा, कमल हासन ने केंद्र से मांगी जवाबदेही; छात्रों की मानसिक पीड़ा पर उठाए सवाल
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों और उनके परिवारों में भारी नाराजगी है। इसी बीच अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ “अन्याय” बताया है।
कमल हासन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि 22 लाख से ज्यादा छात्रों की महीनों की मेहनत और सपने अपराधियों की साजिश की वजह से टूट गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस मानसिक तनाव और असुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने लिखा कि छात्रों ने दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन हर साल NEET परीक्षा किसी न किसी विवाद में फंस जाती है। उनके अनुसार, अब तक शायद ही कोई ऐसा साल रहा हो जब NEET बिना गड़बड़ी के आयोजित हुई हो।
कमल हासन ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उनकी पार्टी लगातार शिक्षा को फिर से राज्य सूची में लाने की मांग कर रही है, ताकि राज्यों को शिक्षा व्यवस्था पर अधिक नियंत्रण मिल सके।
उन्होंने अपने बयान में “एग्जाम माफिया” शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों को इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था और इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क से बचाना बेहद जरूरी है।
दरअसल, NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन बाद में पेपर लीक की आशंकाओं और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट्स के आधार पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी है।
NTA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर सरकार की मंजूरी से परीक्षा को रद्द किया गया है। नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी।
इस फैसले के बाद छात्रों के बीच निराशा और चिंता का माहौल है। कई छात्र सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्हें फिर से तैयारी शुरू करनी पड़ेगी, जबकि मानसिक दबाव पहले से ही बहुत ज्यादा है।
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मेडिकल संगठनों ने भी परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जयदीप कुमार चौधरी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में गंभीर खामियों को उजागर करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार होने वाले विवाद छात्रों का भरोसा कमजोर कर रहे हैं। एक तरफ लाखों युवा डॉक्टर बनने का सपना लेकर कठिन मेहनत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियां उनके भविष्य को अनिश्चित बना देती हैं।
अब सभी की नजरें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और दोषियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
