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बारिश का कहर मुरादाबाद संभल और रामपुर में स्कूल बंद पांच लोगों की मौत से हड़कंप
मुरादाबाद मंडल में भारी बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त, करंट और डूबने से बच्चों की मौत, नदियों का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन ने अलर्ट जारी कर स्कूल बंद किए
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल में सोमवार से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बारिश की वजह से सड़क से लेकर रेलवे और बिजली आपूर्ति तक सब प्रभावित हुआ। सबसे दर्दनाक घटनाएं उन परिवारों के साथ हुईं जिन्होंने अपने अपनों को इस आपदा में खो दिया।
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जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद मंडल के अलग-अलग हिस्सों में पांच लोगों की मौत हुई है। इनमें एक पुलिस सिपाही, तीन किशोर और एक मासूम बच्चा शामिल हैं। चंदौसी में तैनात सिपाही रजनीश ड्यूटी के लिए बारिश के बीच बाइक से जा रहे थे। रास्ते में वाहन को साइड देने के प्रयास में उनका नियंत्रण बिगड़ गया और वे नाले में गिर पड़े। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इसी दौरान मुरादाबाद के लोधीपुर जवाहर नगर में करंट लगने से 17 वर्षीय गणेश की मौत हो गई। कुछ घंटों बाद ही गांव के ही जितेंद्र और अंकुश प्रजापति (दोनों 17 वर्ष) तालाब में नहाने के दौरान डूब गए। परिजनों ने तीनों किशोरों के शवों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
मंडल में सिर्फ किशोर ही नहीं, चार साल की एक बच्ची ने भी अपनी जान गंवाई। तेज बारिश के कारण घर में बिजली का करंट उतर आया और वह मासूम उसकी चपेट में आ गई। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
तेज बारिश की वजह से प्रशासन ने एहतियातन स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है। रामपुर जिले में आठवीं तक, जबकि मुरादाबाद और संभल में नर्सरी से 12वीं तक के सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी विद्यालय मंगलवार को बंद रहेंगे। जिला अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

कालागढ़ डैम से पानी छोड़े जाने के बाद रामगंगा और गागन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारियों ने बताया कि तीन दिनों में करीब 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। रामगंगा का जलस्तर 188.61 मीटर तक पहुंच गया है जबकि खतरे का निशान 190.60 मीटर है।
रेलवे संचालन भी बारिश से प्रभावित रहा। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन और यार्ड में पानी भर जाने के कारण कई ट्रेनों का संचालन घंटों रुका रहा। दुर्गियाना एक्सप्रेस और जनसेवा जैसी ट्रेनें पांच घंटे तक देरी से चलीं। वहीं, दिल्ली-काठगोदाम संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 35 मिनट और योगनगरी-प्रयागराज आधा घंटा लेट पहुंची।
डीआरएम कार्यालय और रेलवे यार्ड में भी पानी भरने से अफसरों और कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। दूसरी ओर, पाकबड़ा क्षेत्र के बिजलीघर में जलभराव होने से 12 गांवों की बिजली सप्लाई बाधित हो गई। देर रात तक कर्मचारी पंपिंग सेट से पानी निकालते रहे लेकिन तब तक गांवों के लोगों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों के अव्यवस्थित निर्माण और जलनिकासी की खराब व्यवस्था इस आपदा को और भयावह बना देती है। बारिश प्राकृतिक है लेकिन लापरवाही से बनी व्यवस्थाएं लोगों की जान पर भारी पड़ रही हैं। प्रशासन ने सभी विभागों को अलर्ट पर रखा है और ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदियों और तालाबों के किनारे न जाएं।
मुरादाबाद मंडल में यह पहली बार नहीं है जब बारिश ने इतना बड़ा संकट खड़ा किया हो। पिछले साल भी बारिश के दिनों में करंट और डूबने से बच्चों की मौत हुई थी। सवाल यह है कि क्या हम हर बार सिर्फ हादसों की गिनती करेंगे या फिर कोई स्थायी समाधान भी तलाशेंगे।
