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क्या इस साल कमजोर रहेगा मानसून? IMD ने जताई El Niño की आशंका, सिर्फ 92% बारिश का अनुमान

ला नीना से एल नीनो की ओर बढ़ते हालात, कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

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IMD Warns of Weak Monsoon 2026, El Niño May Limit Rainfall to 92%
कमजोर मानसून की आशंका—El Niño के कारण इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

देश में इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है। India Meteorological Department (IMD) ने संकेत दिया है कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। विभाग के मुताबिक, इस बार कुल बारिश लंबे समय के औसत (Long Period Average) का लगभग 92% ही रहने की संभावना है।

IMD का कहना है कि मौजूदा मौसमीय स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले La Nina का असर था, अब वह धीरे-धीरे El Nino में बदल रहा है। यही बदलाव मानसून की तीव्रता को कमजोर कर सकता है।

क्या होता है El Niño?
El Niño एक ऐसा मौसमीय पैटर्न है, जिसमें प्रशांत महासागर के पानी का तापमान बढ़ जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है और भारत में अक्सर इससे कम बारिश होती है।

किसानों के लिए क्यों चिंता?
अगर मानसून सामान्य से कम रहता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ता है। खासकर धान, दाल और अन्य खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी क्षेत्र में समय पर बारिश नहीं होती, तो बुवाई में देरी होती है और उत्पादन घट जाता है।

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अर्थव्यवस्था पर भी असर
कमजोर मानसून का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता। इससे ग्रामीण आय घट सकती है, जिससे बाजार में मांग कम होती है। इसके अलावा, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई भी बढ़ सकती है।

क्या पूरी तरह खराब रहेगा मानसून?
विशेषज्ञों का कहना है कि 92% बारिश को ‘नीचे सामान्य’ (below normal) माना जाता है, लेकिन यह बहुत गंभीर स्थिति नहीं होती। अगर बारिश का वितरण सही रहता है, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

IMD Warns of Weak Monsoon 2026, El Niño May Limit Rainfall to 92%


सरकार और किसानों के लिए क्या जरूरी?
ऐसे समय में जल प्रबंधन, सिंचाई सुविधाओं का सही उपयोग और फसल विविधीकरण (crop diversification) बेहद जरूरी हो जाता है।
सरकार को भी किसानों के लिए राहत योजनाओं और बीमा सुविधाओं को मजबूत करना होगा।

निष्कर्ष
IMD की चेतावनी संकेत देती है कि 2026 का मानसून चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, सही तैयारी और रणनीति के साथ इसके असर को कम किया जा सकता है।

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