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Tabu ने ‘हेरा फेरी’ में निभाया था वो किरदार जिसे आज भी लोग भूल नहीं पाए — Priyadarshan ने बताया फिल्म बनाने का असली किस्सा
निर्देशक Priyadarshan ने खुलासा किया कि ‘हेरा फेरी’ में Paresh Rawal ही थे असली हीरो, Akshay और Suniel तो थे सहायक — और Hera Pheri 3 अभी भी कानूनी जाल में फँसी है।
बॉलीवुड में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो रिलीज़ होने के बाद भी खत्म नहीं होतीं — वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती हैं। साल 2000 में आई ‘हेरा फेरी‘ ऐसी ही एक फिल्म है। आज भी इसके डायलॉग्स सोशल मीडिया पर मीम्स बनते हैं, यूट्यूब पर इसके क्लिप्स लाखों व्यूज़ पाते हैं और हर उम्र का दर्शक इसे देखकर उतना ही हँसता है जितना पहली बार हँसा था। लेकिन इस फिल्म के पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी खुद फिल्म।
एक मलयालम फिल्म से जन्मी हिंदी की सबसे बड़ी कॉमेडी
बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘हेरा फेरी’ असल में मलयालम निर्देशक जोड़ी Siddique-Lal की 1989 की फिल्म ‘Ramji Rao Speaking‘ का हिंदी रूपांतरण है। निर्देशक Priyadarshan ने इसे हिंदी दर्शकों के लिए इस तरह ढाला कि मूल फिल्म देखे बिना भी यह अपने आप में एक पूरी और मौलिक रचना लगती है।
Priyadarshan का भारतीय सिनेमा में योगदान बेहद विस्तृत है — उन्होंने ‘विरासत’, ‘मालामाल वीकली’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्में भी दी हैं। लेकिन बॉलीवुड में उनकी पहचान का सबसे बड़ा हिस्सा ‘हेरा फेरी’ ही है।

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Paresh Rawal थे फिल्म के असली हीरो
Pinkvilla के साथ हाल ही में हुई बातचीत में Priyadarshan ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब वे फिल्म बना रहे थे, तब उन्होंने Paresh Rawal को फोन करके साफ कहा था — “तुम इस फिल्म के हीरो हो। Akshay का राजू और Suniel का श्याम सहायक किरदार हैं।”
Priyadarshan के अनुसार, उस वक्त Paresh Rawal ज़्यादातर खलनायक के रोल कर रहे थे। बाबूराव गणपतराव आप्टे का किरदार उनके करियर का एक नया मोड़ था। Paresh ने कहा था — “मैं दिल और जान लगा दूँगा।” और उन्होंने लगाई भी। यही वजह है कि बाबूराव आज एक pop-culture icon बन चुके हैं।
यह कुछ वैसा ही है जैसे Amitabh Bachchan को ‘दीवार’ और ‘ज़ंजीर’ से पहले सहायक या साधारण किरदारों में देखा जाता था — एक सही निर्देशक और एक सही किरदार पूरी ज़िंदगी बदल देता है।
जब बाबूराव बन गया बंधन
लेकिन जो किरदार पहचान देता है, वही कभी-कभी बेड़ियाँ भी बन जाता है। Paresh Rawal ने The Lallantop को दिए एक इंटरव्यू में बाबूराव के किरदार को “गले का फंदा” कहा था। उनके शब्द थे — “मुझे घुटन होने लगी थी। मुझे मुक्ति चाहिए थी।”
इसी सोच के साथ 2007 में वे निर्देशक Vishal Bhardwaj के पास गए — यह चाहते हुए कि उसी लुक में कोई बिल्कुल अलग किरदार मिले जो उनकी छवि को नया आयाम दे।
यह अनुभव सिर्फ Paresh का नहीं है। हिंदी सिनेमा में Dharmendra को भी एक्शन हीरो की छवि से बाहर निकलने में वर्षों लग गए थे। टाइपकास्टिंग एक ऐसी हकीकत है जिससे सबसे बड़े अभिनेता भी नहीं बच पाते।

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Tabu का वो किरदार जो याद रह गया
‘हेरा फेरी’ में Tabu ने भी एक यादगार भूमिका निभाई थी। हालाँकि मुख्य चर्चा हमेशा तीन पुरुष किरदारों की होती है, लेकिन Tabu की मौजूदगी ने फिल्म को एक अलग संतुलन दिया। Tabu उन अभिनेत्रियों में हैं जो हर तरह के किरदार को अपना बना लेती हैं — चाहे ‘मकबूल’ हो, ‘हैदर’ हो या ‘हेरा फेरी’।
‘हेरा फेरी 3’ — कब आएगी खुशखबरी?
फिल्म के तीसरे पार्ट को लेकर दर्शकों में उत्सुकता कोई नई बात नहीं है। लेकिन Priyadarshan ने साफ कर दिया है कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनके अनुसार, “कई कानूनी पेचीदगियाँ हैं। जब तक वे नहीं सुलझतीं, फिल्म शुरू नहीं हो सकती।”
पिछले कुछ सालों में इस फिल्म को लेकर कई अफवाहें उड़ीं — कभी नए कलाकारों की एंट्री की बात हुई, कभी ओरिजिनल कास्ट के बीच मतभेदों की खबरें आईं। लेकिन जब तक कानूनी मामले नहीं सुलझते, दर्शकों को इंतज़ार ही करना होगा।
रीमेक की आत्मा लेना — नकल करना नहीं
Priyadarshan ने रीमेक को लेकर एक बेहद ज़रूरी बात कही। उनका मानना है कि जब भी उन्होंने कोई रीमेक बनाई, उन्होंने सिर्फ उसकी “आत्मा” ली — बाकी सब नए सिरे से लिखा। उन्होंने यह भी माना कि आज रीमेक का दौर समाप्त हो रहा है क्योंकि OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शक मूल फिल्में खुद देख सकते हैं।
यह एक ईमानदार स्वीकृति है। ‘हेरा फेरी’ जैसी फिल्म इसलिए अमर है क्योंकि उसमें सिर्फ एक कहानी नहीं थी — उसमें आम इंसान की बेबसी, उसके सपने और उसकी हँसी थी। और यही चीज़ किसी भी फिल्म को कालजयी बनाती है।
