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पटाखों पर बयान देकर घिरीं Maneka Gandhi ‘देशद्रोही’ टिप्पणी से मचा सियासी तूफान

दिवाली, प्रदूषण और पटाखों को लेकर दिए गए बयान ने बढ़ाया विवाद, सोशल मीडिया से लेकर राजनीति तक गरमाई बहस।

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पटाखों और प्रदूषण पर बयान देने के बाद चर्चा में आईं भाजपा नेता मेनका गांधी।
पटाखों और प्रदूषण पर बयान देने के बाद चर्चा में आईं भाजपा नेता मेनका गांधी।

दिवाली से पहले देश में पटाखों और प्रदूषण को लेकर बहस तेज़ हो जाती है, लेकिन इस बार यह मुद्दा सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा। मेनका गांधी के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर हलचल मचा दी है।

एक कार्यक्रम के दौरान मेनका गांधी ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग पटाखों का इस्तेमाल करते हैं, वे देश के खिलाफ काम कर रहे हैं। उनके इस बयान के सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया और विपक्ष ने इसे आम लोगों की भावनाओं से जोड़कर देखा।

प्रदूषण पर क्या कहा?

मेनका गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में दिवाली से पहले तक हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है, लेकिन त्योहार के दौरान प्रदूषण अचानक बढ़ जाता है। उन्होंने पराली जलाने और गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को इस मुद्दे से अलग बताते हुए कहा कि पटाखों का असर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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‘ग्रीन पटाखों’ पर भी सवाल

उन्होंने तथाकथित “ग्रीन पटाखों” की अनुमति को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की और कहा कि ग्रीन पटाखा नाम की कोई चीज़ वास्तव में होती ही नहीं। उनका मानना है कि जब तक धुआं और आवाज़ है, तब तक पर्यावरण पर असर पड़ना तय है।

पटाखों और प्रदूषण पर बयान देने के बाद चर्चा में आईं भाजपा नेता मेनका गांधी।


राजनीतिक प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर बहस

इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने मेनका गांधी पर तीखा हमला बोला। कई नेताओं ने कहा कि त्योहारों को देशभक्ति से जोड़ना या तोड़ना सही नहीं है। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आए—कुछ ने पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बयान का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे आम जनता के खिलाफ बताया।

Dainik Diary की नजर

पटाखों और प्रदूषण का मुद्दा हर साल उठता है, लेकिन भाषा और शब्दों का चयन बहस की दिशा तय कर देता है। पर्यावरण की चिंता जरूरी है, लेकिन त्योहारों से जुड़ी भावनाओं को ध्यान में रखना भी उतना ही अहम है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान सिर्फ एक विवाद बनकर रह जाता है या नीति और सोच में किसी बदलाव की ओर इशारा करता है।

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