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भवानीपुर में Mamata Banerjee की बड़ी हार: Suvendu Adhikar अधिकारी ने 15,000+ वोटों से पलटा खेल
शुरुआती बढ़त के बावजूद टीएमसी का गढ़ ढहा, बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने फिर दी कड़ी टक्कर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। लंबे समय से भवानीपुर सीट पर मजबूत पकड़ रखने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,114 वोटों से हराकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
यह सीट दक्षिण कोलकाता का एक अहम क्षेत्र मानी जाती है और वर्षों से तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रही है। लेकिन इस बार नतीजे ने सभी को चौंका दिया।
शुरुआती बढ़त, फिर अचानक पलटा माहौल
गिनती के शुरुआती दौर में ममता बनर्जी मजबूत स्थिति में नजर आ रही थीं। सातवें राउंड तक वह 17,000 से ज्यादा वोटों की बढ़त बनाए हुए थीं। ऐसा लग रहा था कि वह आसानी से यह चुनाव जीत जाएंगी।
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लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, उनकी बढ़त धीरे-धीरे कम होती गई। 14वें राउंड तक यह अंतर घटकर 4,000 वोटों से भी कम रह गया और आखिरकार पूरी तरह खत्म हो गया। अंतिम नतीजों में सुवेंदु अधिकारी ने निर्णायक बढ़त बनाकर जीत दर्ज की।
प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका था चुनाव
भवानीपुर सीट इस बार सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई थी। दोनों ही बड़े नेता मतगणना केंद्र पर मौजूद रहे, जिससे इस मुकाबले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है, खासकर तब जब टीएमसी इस सीट को अपना सबसे सुरक्षित क्षेत्र मानती रही है।
दूसरी बार आमने-सामने में हारीं ममता
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर भी अधिकारी ने उन्हें करीब 2,000 वोटों से हराया था।
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हालांकि, उसके बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी। 2011 से वह इस सीट का प्रतिनिधित्व करती आ रही थीं, लेकिन इस बार की हार ने उनके राजनीतिक किले में दरार डाल दी है।
क्या बदलेगा बंगाल का राजनीतिक समीकरण?
इस हार के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। क्या यह बीजेपी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़त है? या टीएमसी इस झटके से उबरकर फिर से मजबूती दिखाएगी?
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि भवानीपुर की इस हार का असर पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति पर कितना गहरा पड़ता है।
