Connect with us

World News

हिरोशिमा की तबाही देख चुका जापान अब ट्रंप की ईरान जंग में घिरा क्या टोक्यो होर्मुज़ जलडमरूमध्य की रक्षा करेगा?

अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमलों के बाद तेल आयात पर 90% निर्भर जापान की नई प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के सामने सबसे बड़ा कूटनीतिक इम्तिहान

Published

on

जापान और ट्रंप की ईरान जंग: हिरोशिमा देख चुका देश फिर परमाणु संकट में | Dainik Diary
हिरोशिमा की भयावह विरासत को याद करते हुए जापान एक बार फिर परमाणु संकट की आँच में — ट्रंप के ईरान युद्ध ने टोक्यो को मुश्किल में डाला।

नई दिल्ली/टोक्यो। अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरे थे — उस भयावह तबाही को जापान ने न सिर्फ देखा, बल्कि सीने पर झेला। उन जख्मों ने जापान को दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु-विरोधी देश बना दिया। लेकिन आज, ठीक 80 साल बाद, वही जापान एक नई परमाणु संकट की आँच में झुलसने को मजबूर हो रहा है — और इस बार आग लगाई है खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने।

ट्रंप की जंग, जापान का सिरदर्द

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर एक साथ करीब 900 हवाई हमले किए। महज 12 घंटों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, सैन्य ठिकाने और परमाणु सुविधाएँ तबाह कर दी गईं। ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई इन हमलों में मारे गए, लेकिन मिनाब के पास एक लड़कियों के स्कूल में मिसाइल गिरने से करीब 170 निर्दोष लोगों की भी जान गई।

अब जबकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य युद्ध की भेंट चढ़ रहा है, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान की नींद उड़ गई है। जापान अपनी तेल जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक इसी जलमार्ग से पूरा करता है। यानी अगर होर्मुज़ बंद हुआ, तो जापान की फैक्ट्रियाँ ठंडी पड़ जाएँगी, गाड़ियाँ रुक जाएँगी और आम जापानी नागरिक की जेब पर सीधी मार पड़ेगी।

और भी पढ़ें  “ईरान युद्ध इज़रायल के दबाव में शुरू हुआ” Trump के सबसे बड़े आतंकवाद-रोधी अधिकारी Joe Kent ने दे दिया इस्तीफा

ट्रंप का फरमान — “अपना तेल खुद बचाओ”

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जापान समेत अपने सहयोगियों को सीधे आदेश दिया कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा खुद करें, क्योंकि यह उन्हीं का हित है। उनका तर्क था — “यह आपका तेल है, आपकी जरूरत है, तो आप ही आकर रक्षा करें।”

लेकिन यह मामला इतना आसान नहीं है। जापान का संविधान उसे किसी विदेशी युद्ध में सैन्य भागीदारी से रोकता है। एक विशेषज्ञ ने CNBC को बड़े ही दिलचस्प अंदाज में समझाया — “यह तो ऐसे है जैसे किसी पवित्र सुमो पहलवान से अमेरिकन फुटबॉल खेलने को कहा जाए।”

जापानी PM ताकाइची की परीक्षा

जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की ट्रंप के साथ यह पहली मुलाकात थी — वो भी तब, जब वे फरवरी में हुए चुनावों में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी जीत दिला चुकी हैं। मुलाकात से पहले तय था कि बातचीत जापान के अमेरिका में निवेश, रक्षा खर्च बढ़ाने और व्यापार पर केंद्रित होगी। जापान अमेरिका में कुल 550 अरब डॉलर का निवेश करने पर सहमत हुआ है, जिसमें अगली पीढ़ी के परमाणु रिएक्टर और प्राकृतिक गैस संयंत्र शामिल हैं। लेकिन ईरान की जंग ने पूरा एजेंडा पलट दिया।

तेल की कीमत आसमान पर, आम आदमी परेशान

होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने की वजह से वैश्विक तेल व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है — कच्चे तेल की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर कई बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा चुकी है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है, जहाँ पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

जापान और ट्रंप की ईरान जंग: हिरोशिमा देख चुका देश फिर परमाणु संकट में | Dainik Diary


क्या वाकई ईरान परमाणु खतरा था?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ने यह जंग क्यों शुरू की? उनका दावा था कि ईरान दो हफ्तों में परमाणु बम बना लेता। लेकिन हथियार नियंत्रण विशेषज्ञों ने बताया कि जून 2025 की बमबारी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पहले से ही बाधित कर दिया था और इस बात का कोई प्रमाण नहीं था कि ईरान उसे दोबारा बना रहा था। यहाँ तक कि ट्रंप की अपनी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने संसदीय सुनवाई में माना कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम नष्ट हो चुका है और उसे दोबारा बनाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही।

हिरोशिमा की याद और आज की हकीकत

जापान के लिए यह सिर्फ एक भू-राजनीतिक संकट नहीं — यह उसकी आत्मा को छूने वाला मामला है। परमाणु हथियारों के खिलाफ जापान की आवाज़ हमेशा सबसे ऊँची रही है। लेकिन आज वह उस देश का साथ देने के लिए मजबूर है जिसने परमाणु युद्ध की धमकी के बल पर एक देश को बर्बाद किया।

दुनिया देख रही है कि जब ताकत की राजनीति हावी होती है, तो इतिहास के घाव फिर से हरे हो जाते हैं।

— दैनिक डायरी न्यूज़ डेस्क

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *