International Affairs
Hormuz का फंदा — Iran के प्रतिनिधि बोले, “अमेरिका ने छोड़ी बातचीत की मेज़, हम तैयार थे”
Strait of Hormuz पर बढ़ते तनाव के बीच India में Iran के Supreme Leader के प्रतिनिधि Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi ने कहा कि कुछ जहाज़ों को गुज़रने दिया जा रहा है, लेकिन हालात ठीक नहीं हैं।
दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz इन दिनों एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। यह वही रास्ता है जहाँ से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुज़रता है। और अब इसी रास्ते पर US और Iran आमने-सामने हैं।
India में Iran के Supreme Leader के प्रतिनिधि Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि Strait of Hormuz से कुछ जहाज़ों को अभी भी गुज़रने दिया जा रहा है, लेकिन स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने साफ कहा, “यह जलडमरूमध्य सिर्फ अमेरिका का नहीं, सभी देशों का है। युद्ध से पहले यह रास्ता खुला था और सभी देश इससे फायदा उठा रहे थे। युद्ध की वजह से यहाँ टकराव और सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं। हम चाहते हैं कि यह Strait खुला रहे।”
अमेरिका ने छोड़ी मेज़, ईरान ने नहीं
US-Iran बातचीत को लेकर Ilahi का बयान बेहद सीधा था। उन्होंने कहा कि Iran ने कभी बातचीत नहीं छोड़ी, बल्कि US ही पीछे हटा। “हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन तर्क, गरिमा, इंसानियत और हमारे अधिकारों के सम्मान के आधार पर। अमेरिका ने बहुत कुछ माँगा। उन्होंने कहा कि वे 90 प्रतिशत नहीं चाहते, 95 प्रतिशत नहीं चाहते, वे 100 प्रतिशत चाहते हैं।”
यह बयान उस Islamabad meeting के बाद आया जो शनिवार से रविवार तक चली। यह पिछले दस सालों में US और Iran के बीच पहली सीधी बातचीत थी। बल्कि 1979 की Iran की Islamic Revolution के बाद से यह सबसे ऊँचे स्तर की diplomatic बातचीत मानी जा रही है।
US का blockade और उसके असर
जब बातचीत विफल रही तो US Central Command ने सोमवार से Iranian ports और coastal areas में घुसने और निकलने वाले सभी जहाज़ों पर blockade लागू करने का ऐलान किया। यह blockade सोमवार सुबह 10 बजे Eastern Time यानी भारतीय समय के अनुसार शाम 7:30 बजे से लागू होना था।
US military ने यह भी कहा कि Arabian Gulf और Gulf of Oman में ईरान के सभी बंदरगाहों पर यह नियम लागू होगा, चाहे जहाज़ किसी भी देश का हो। हालाँकि जो जहाज़ Strait of Hormuz से गैर-ईरानी बंदरगाहों की तरफ जा रहे हैं, उन्हें रोका नहीं जाएगा।
Donald Trump ने रविवार को यह भी कहा कि US forces उन सभी जहाज़ों को रोकेंगी जिन्होंने Iran को कोई toll अदा किया है, चाहे वे international waters में ही क्यों न हों।

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Persian Gulf में अमेरिकी जहाज़ों पर सवाल
Ilahi ने यह भी पूछा कि Persian Gulf में American ships क्या कर रही हैं। उनका कहना था कि Iran खुद उस इलाके के सभी जहाज़ों को सुरक्षा देने में सक्षम है। “American ships को वहाँ से जाना चाहिए। हम सभी जहाज़ों की सुरक्षा कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने दुनिया के नेताओं और शांति चाहने वाले लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस युद्ध को रोकने के लिए अपनी आवाज़ उठाएँ।
भारत पर असर कितना गहरा हो सकता है?
Strait of Hormuz भारत के लिए सिर्फ एक geographical route नहीं है। भारत अपनी energy ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा Middle East से पूरा करता है। अगर यह Strait लंबे समय तक बाधित रहा तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका असर common आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर सीधे पड़ेगा।
यही कारण है कि यह मसला सिर्फ US और Iran का नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया का हो गया है। जिस तरह 1990 में Gulf War के दौरान oil supply बाधित हुई थी और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई थी, कुछ वैसा ही खतरा अब फिर मंडरा रहा है।
शांति की राह कहाँ है?
Islamabad वार्ता के विफल होने के बाद diplomatic रास्ते फिलहाल बंद दिखते हैं। लेकिन Ilahi के बयान से यह ज़रूर स्पष्ट है कि Iran अभी भी बातचीत का दरवाज़ा खुला रखना चाहता है, बशर्ते बातचीत बराबरी के आधार पर हो।
Gulf में युद्ध के छह हफ्ते में हज़ारों जानें जा चुकी हैं, energy supplies पर असर पड़ा है और पूरे West Asia में एक बड़े regional conflict की आशंका बनी हुई है। Ceasefire की एक कोशिश मंगलवार को हुई थी, लेकिन उसके बाद भी तनाव कम नहीं हुआ।
अब देखना यह है कि दुनिया के बाकी देश इस मामले में क्या भूमिका निभाते हैं। क्या कोई तीसरा पक्ष इस खतरनाक मोड़ पर दोनों देशों को फिर बातचीत की मेज़ पर ला सकता है? फिलहाल तो Hormuz की लहरें बेचैन हैं।
