International Affairs
लेबनान में ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ने का मामला: इज़रायली सेना ने माना सच, कहा—‘हमारे मूल्यों के खिलाफ’
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर के बाद IDF की सफाई, सैनिक के खिलाफ कार्रवाई शुरू
दक्षिणी लेबनान में एक विवादास्पद घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। Israel Defense Forces (IDF) ने पुष्टि की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर असली है, जिसमें एक सैनिक को ईसा मसीह की मूर्ति को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है।
यह तस्वीर सामने आते ही तेजी से वायरल हो गई, जिसमें कथित तौर पर एक इज़रायली सैनिक ऑपरेशन के दौरान एक धार्मिक प्रतीक को तोड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। घटना के बाद IDF ने तुरंत जांच शुरू की और शुरुआती जांच में तस्वीर की प्रामाणिकता को स्वीकार किया।
IDF ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह आचरण सेना के मूल्यों और आचार संहिता के पूरी तरह खिलाफ है। सेना ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मामले को अपने उत्तरी कमांड के पास भेज दिया है, जहां इस पर कार्रवाई की जा रही है।
सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी भी धार्मिक स्थल या प्रतीक को नुकसान पहुंचाना नहीं है। साथ ही, IDF ने यह आश्वासन दिया कि वह स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर क्षतिग्रस्त मूर्ति को फिर से स्थापित करने में मदद करेगा।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के ठिकानों के खिलाफ अभियान चला रही है। इन ऑपरेशनों का मकसद संगठन के सैन्य ढांचे को कमजोर करना बताया जा रहा है।
हालांकि, इस घटना ने धार्मिक संवेदनशीलता और सैन्य कार्रवाई के बीच संतुलन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और दोषी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
