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“थक गई हूं, लेकिन टूट नहीं सकती” — इज़राइल में बम शेल्टर में बंद भारतीय वैज्ञानिक की दिल दहला देने वाली कहानी

ओडिशा की बेटी सुचिस्मिता, पति और दो बच्चों के साथ ज़मीन के नीचे छुपी है — फर्श पर बिछी चादर पर खाना, बंक बेड पर सोते बच्चे, और बाहर गिरती मिसाइलें।

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इज़राइल के बेएर शेबा में बम शेल्टर में बंद भारतीय वैज्ञानिका सुचिस्मिता मुदुली बैरन अपने परिवार के साथ — ईरानी मिसाइल हमलों के बीच फर्श पर खाना खाते हुए।

युद्ध की खबरें अक्सर नंबरों में आती हैं — कितनी मिसाइलें गिरीं, कितने मारे गए, कितने ठिकाने तबाह हुए। लेकिन इन नंबरों के पीछे असली इंसान होते हैं। असली परिवार होते हैं। असली डर होता है।

इज़राइल के बेएर शेबा शहर में रहने वाली भारतीय वैज्ञानिका सुचिस्मिता मुदुली बैरन की कहानी उन्हीं असली इंसानों की कहानी है।

ओडिशा से इज़राइल — और अब बम शेल्टर में

ओडिशा में जन्मी सुचिस्मिता आज इज़राइल में एक वैज्ञानिक के रूप में काम करती हैं। उनका परिवार — पति और दो छोटे बच्चे — सब वहीं रहते हैं। शनिवार को जब ईरान की मिसाइलें इज़राइल की तरफ आने लगीं, तो सुचिस्मिता को भी लाखों इज़राइलियों की तरह बम शेल्टर में जाना पड़ा।

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उन्होंने Instagram पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वो, उनके पति और बच्चे शेल्टर के अंदर बैठे दिख रहे हैं। साथ में लिखा — “शेल्टर में बंद हैं। मज़बूत बने हुए हैं और एक-दूसरे की रक्षा कर रहे हैं। बेहतर दिनों की उम्मीद है।”

यह एक माँ का पोस्ट था — जो डरी हुई थी, लेकिन डर को अपने चेहरे पर नहीं आने देना चाहती थी।

फर्श पर चादर, डिस्पोजेबल प्लेट में खाना

शेल्टर की ज़िंदगी कैसी होती है — सुचिस्मिता ने अपनी पोस्ट्स से यह दिखाया। एक वीडियो में पूरा परिवार फर्श पर बिछी चादर पर बैठकर खाना खा रहा है — सादा पास्ता, डिस्पोजेबल प्लेटों में।

यह दृश्य देखकर दिल भारी हो जाता है। जो महिला एक दिन पहले तक लैब में रिसर्च कर रही थी — वो आज ज़मीन के नीचे अपने बच्चों को खाना खिला रही है।

एक और क्लिप में उनके बच्चे बंक बेड पर सो रहे हैं।

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“नींद अब पहले जैसी नहीं रही”

सुचिस्मिता ने जो लिखा, वो पढ़कर आंखें नम हो जाती हैं —

“नींद अब पहले जैसी नहीं रही। हम पूरी तरह सोते नहीं — सतर्क रहते हैं, सुनते रहते हैं, इंतज़ार करते रहते हैं। यह थका देने वाला है। लेकिन एक माँ के रूप में मेरे पास टूट जाने का विकल्प नहीं है। मैं ताकत चुनती हूं। मैं शांति चुनती हूं। मैं उम्मीद चुनती हूं। और प्रार्थना करती हूं कि कल थोड़ा हल्का हो।”

यह शब्द किसी भी माँ के दिल को छू जाएंगे — चाहे वो भारत में हो, इज़राइल में हो या दुनिया के किसी भी कोने में।

इज़राइल में बम शेल्टर — रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा

भारत में हम शायद यह नहीं जानते — लेकिन इज़राइल में बम शेल्टर घरों, स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों में क़ानूनी रूप से बनाए जाते हैं। यहां यह कोई आपात व्यवस्था नहीं — यह रोज़मर्रा की तैयारी का हिस्सा है।

दशकों के संघर्ष और मिसाइल खतरों ने इज़राइल को यह सिखाया है कि हर घर में एक सुरक्षित कमरा होना ज़रूरी है। यह उस देश की त्रासदी भी है और मज़बूती भी।

सुचिस्मिता जैसे हज़ारों भारतीय आज इज़राइल में फंसे हैं। भारत सरकार की नज़रें इस पर हैं — और देशवासियों की दुआएं इन सभी के साथ हैं।

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