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Dharmendra की आखिरी इच्छा पूरी: 5 करोड़ की पैतृक जमीन बच्चों को नहीं, इन खास लोगों को कर दी थी गिफ्ट

Sunny Deol और Bobby Deol नहीं, बल्कि लुधियाना के डांगो गांव में रहने वाले भतीजे बने धर्मेंद्र की 2.5 एकड़ पैतृक संपत्ति के असली हकदार—रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

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धर्मेंद्र ने निधन से पहले निभाई पिता की कसमें—2.5 एकड़ पैतृक जमीन बच्चों को नहीं, भतीजों को सौंप दी
धर्मेंद्र ने निधन से पहले निभाई पिता की कसमें—2.5 एकड़ पैतृक जमीन बच्चों को नहीं, भतीजों को सौंप दी

24 नवंबर 2025 को दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन ने पूरे फिल्म जगत को गहरे सदमे में डाल दिया था। अपनी अदाकारी, सादगी और दिल से किए गए वादों के लिए प्रसिद्ध धर्मेंद्र ने अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति, बेशुमार यादें और एक बड़ा परिवार छोड़ा—जिसमें Sunny Deol, Bobby Deol, अजीता, विजेता, Esha Deol और अहाना देओल शामिल हैं।

लेकिन, एक हालिया रिपोर्ट सामने आई है जिसने सभी को चौंका दिया है—धर्मेंद्र की पैतृक संपत्ति उनके किसी भी बच्चे की नहीं, बल्कि उन भतीजों की है, जिनका नाम शायद ही कभी बॉलीवुड खबरों में आता हो।

भतीजों को दी 5 करोड़ की पैतृक जमीन—परिवार भी हैरान

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना जिले के छोटे से गांव डांगो में स्थित धर्मेंद्र की पैतृक जमीन—लगभग 2.5 एकड़, जिसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जाती है—उन्होंने जीवनकाल में ही अपने भतीजों को गिफ्ट कर दी थी।

ये भतीजे, उनके चाचा के पोते हैं, जो वर्षों से उसी मिट्टी में रह रहे हैं और उसी घर को संभालते आ रहे हैं जिसमें धर्मेंद्र ने बचपन के कई साल बिताए थे।

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डांगो गांव से धर्मेंद्र का भावनात्मक रिश्ता

हालांकि धर्मेंद्र का जन्म नसराली गांव में हुआ था, पर उनके बचपन की कई यादें डांगो की गलियों में ही लिखी गईं।
मिट्टी से बने उनका पैतृक घर आज भी वहां खड़ा है—सादा, पुराना, लेकिन भावनाओं से भरा।

रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मेंद्र जीवनभर उस घर और गांव से जुड़े रहे। गांववालों को आज भी 2013 का वो दिन याद है जब एक फिल्म की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र अचानक डांगो पहुंचे थे।

धर्मेंद्र ने निधन से पहले निभाई पिता की कसमें—2.5 एकड़ पैतृक जमीन बच्चों को नहीं, भतीजों को सौंप दी


कार से उतरकर उन्होंने
“आंगन की मिट्टी माथे से लगाई और कुछ मिनटों तक मौन होकर वहीं खड़े रहे”—यह दृश्य आज भी गांव के बुजुर्ग भावुक होकर याद करते हैं।

2025 में लौटकर अपना वादा निभाया

मृत्यु से कुछ महीने पहले 2025 में धर्मेंद्र एक बार फिर डांगो पहुंचे—इस बार एक बड़ी जिम्मेदारी निभाने।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह जमीन उन्हें उनके पिता की एक अंतिम इच्छा के रूप में मिली थी—और उन्होंने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसे अपने चाचा के परिवार को सौंप दिया।

उन्होंने दस्तावेज़ों में संपत्ति को आधिकारिक रूप से अपने भतीजों के नाम ट्रांसफर कर दिया ताकि वे बिना किसी चिंता के अपने घर में रह सकें।

फैंस भी रह गए हैरान—“धरती से जुड़े धर्मेंद्र”

सोशल मीडिया पर लोग धर्मेंद्र के इस फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
कई फैन्स लिख रहे हैं—
“धर्मेंद्र वही थे—दिल से किसान और दिल से इंसान।”
“यही वजह है कि पूरा देश उन्हें इतना प्यार करता था।”

उनका यह कदम सिर्फ पैतृक संपत्ति का ट्रांसफर नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को संस्कार, वादा और ज़िम्मेदारी सौंपने जैसा है।