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अमेरिका के नए ग्रीन कार्ड नियम पर भड़की टेक दुनिया, LinkedIn और Coursera के संस्थापकों ने उठाए बड़े सवाल
ट्रंप प्रशासन की नई इमिग्रेशन पॉलिसी पर सिलिकॉन वैली में नाराज़गी, AI रिसर्च और टेक इंडस्ट्री पर असर को लेकर बढ़ी चिंता
अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर लागू किए गए नए नियम ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई नीति के तहत अब कई ग्रीन कार्ड आवेदकों को अपने आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अमेरिका छोड़कर अपने गृह देश लौटना पड़ सकता है। इस फैसले के बाद सिलिकॉन वैली के बड़े टेक उद्यमियों और कंपनियों ने खुलकर नाराज़गी जताई है।
LinkedIn के सह-संस्थापक Reid Hoffman ने इस नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे अमेरिका की टेक्नोलॉजी और रिसर्च क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या अब AI रिसर्चर्स, टेक कर्मचारियों और विदेशी छात्रों को अपना काम बीच में छोड़कर अमेरिका से बाहर जाना पड़ेगा और फिर लंबे बैकलॉग का इंतजार करना होगा?
उन्होंने इसे “टेक, बिजनेस और पूरे अमेरिका के लिए नुकसानदायक कदम” बताया। उनका मानना है कि अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत दुनियाभर से आने वाली प्रतिभाएं रही हैं, लेकिन ऐसे नियम उस ताकत को कमजोर कर सकते हैं।
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इस मुद्दे पर सिर्फ LinkedIn ही नहीं बल्कि ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म Coursera के संस्थापक भी चिंता जाहिर कर चुके हैं। टेक सेक्टर का कहना है कि अमेरिका की AI और इनोवेशन इंडस्ट्री पहले से ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। ऐसे समय में विदेशी प्रतिभाओं के लिए प्रक्रिया को और कठिन बनाना देश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों पर पड़ सकता है। हर साल हजारों भारतीय इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और AI विशेषज्ञ अमेरिका में नौकरी और रिसर्च के लिए जाते हैं। अगर उन्हें बीच में वापस लौटना पड़ा, तो कई कंपनियों की परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

सिलिकॉन वैली की कई कंपनियां पहले भी अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की मांग कर चुकी हैं। उनका तर्क है कि दुनिया के बेहतरीन दिमागों को आकर्षित करना अमेरिका की आर्थिक और तकनीकी बढ़त के लिए बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस नए नियम को लेकर बहस तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और नौकरी सुरक्षा से जोड़कर सही ठहरा रहे हैं, जबकि टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोग इसे “ब्रेन ड्रेन” बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विदेशी टैलेंट के लिए माहौल कठिन हुआ, तो वे कनाडा, ब्रिटेन या यूरोप जैसे देशों की ओर रुख कर सकते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच यह साफ दिखाई दे रहा है कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीति अब सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर टेक्नोलॉजी, AI रिसर्च और वैश्विक बिजनेस पर भी पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विरोध के बाद अपने फैसले में कोई बदलाव करती है या नहीं।
