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Patriot Movie Review: बड़े सितारे, बड़ा कैनवास… लेकिन कहानी रह गई अधूरी
Mammootty और Mohanlal की दमदार मौजूदगी भी ‘Patriot’ को नहीं बचा पाई कमजोर स्क्रिप्ट से
मलयालम सिनेमा के दो दिग्गज कलाकार—मम्मूट्टी और मोहनलाल—जब एक ही फिल्म में नजर आते हैं, तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप आसमान छूने लगती हैं। Patriot भी कुछ ऐसी ही उम्मीदों के साथ सिनेमाघरों में उतरी, लेकिन अफसोस कि यह फिल्म अपनी कहानी के मोर्चे पर लड़खड़ा जाती है।
फिल्म का निर्देशन Mahesh Narayanan ने किया है, जिन्होंने पहले भी अपने अलग अंदाज के लिए पहचान बनाई है। इस बार उन्होंने एक ऐसे विषय को चुना है जो तकनीक, सत्ता और नैतिकता के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करता है।
कहानी एक खतरनाक डिजिटल टूल ‘Periscope’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो काफी हद तक असल दुनिया के चर्चित स्पाइवेयर ‘Pegasus’ की याद दिलाता है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे इस तकनीक का गलत इस्तेमाल लाखों लोगों की निजता और सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
हालांकि प्लॉट सुनने में बेहद दिलचस्प लगता है, लेकिन स्क्रीन पर इसे जिस तरह पेश किया गया है, वह उतना प्रभावशाली नहीं बन पाता। फिल्म में कई ऐसे मौके आते हैं जहां कहानी गहराई पकड़ सकती थी, लेकिन वह सतह पर ही घूमती रह जाती है।

मम्मूट्टी और मोहनलाल दोनों ही अपने-अपने किरदारों में स्टाइल और गरिमा लेकर आते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है, लेकिन स्क्रिप्ट की कमजोरी के चलते उनके अभिनय का पूरा असर नहीं दिख पाता। ऐसा लगता है जैसे दोनों सितारे फिल्म को अपने कंधों पर उठाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन कहानी उनका साथ नहीं दे रही।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और सिनेमैटोग्राफी जरूर तारीफ के काबिल हैं, जो इसे एक स्टाइलिश लुक देते हैं। लेकिन केवल स्टाइल के सहारे फिल्म को यादगार नहीं बनाया जा सकता।
अगर कुल मिलाकर बात करें, तो ‘Patriot’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें दमदार स्टारकास्ट और शानदार आइडिया तो है, लेकिन उसे सही तरीके से पेश करने में चूक हो गई है। यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर तो करती है, लेकिन दिल में कोई खास छाप नहीं छोड़ पाती।
रेटिंग: 2.5/5
