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ईरान की मस्जिद पर लहराया ‘बदले का लाल झंडा’ — खामेनेई की मौत के बाद दुनिया को मिला खतरनाक संदेश
क़ोम के जमकरान मस्जिद के गुंबद पर चढ़ा लाल झंडा — इतिहास में यह तब उठता है जब ईरान खून का बदला खून से लेने की कसम खाता है।
कभी-कभी एक झंडा हज़ार शब्दों से ज़्यादा बोलता है।
शनिवार को इज़राइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। रविवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की। और उसके कुछ ही घंटों बाद ईरान के पवित्र शहर क़ोम की जमकरान मस्जिद के गुंबद पर एक लाल झंडा फहराया गया।
यह कोई साधारण झंडा नहीं था। यह था — “बदले का झंडा।”
लाल झंडे का मतलब क्या है?
ईरान की शिया परंपरा में लाल झंडा एक बेहद गंभीर प्रतीक है। यह तब उठाया जाता है जब किसी बड़े नेता या शहीद की मौत का बदला लेने की कसम खाई जाती है। यह शांति का नहीं — युद्ध और प्रतिशोध का संदेश है।
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इससे पहले यही लाल झंडा 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद उठाया गया था। उस वक्त ईरान ने इराक में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागी थीं। आज वही झंडा फिर उठा है — लेकिन इस बार निशाना सिर्फ एक जनरल नहीं, खुद सुप्रीम लीडर हैं।
यानी बदले की आग 2020 से कहीं ज़्यादा भड़कने वाली है।
जमकरान मस्जिद — क्यों है इतनी खास?
क़ोम शहर ईरान का सबसे पवित्र धार्मिक केंद्र है। जमकरान मस्जिद शिया मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लाखों श्रद्धालु हर साल आते हैं।
इस मस्जिद के गुंबद पर लाल झंडा उठाना ऐसा है जैसे किसी देश की सबसे पवित्र जगह से युद्ध का एलान किया जाए। यह सिर्फ राजनीतिक संदेश नहीं — यह धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ संदेश है। और धर्म से जुड़ी भावनाएं राजनीति से कहीं ज़्यादा गहरी होती हैं।

ट्रंप बोले — “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक मर गया”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत पर बयान दिया — “खामेनेई — इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक — मर गया।”
उन्होंने आगे कहा — “यह ईरानी जनता के लिए अपना देश वापस लेने का सबसे बड़ा मौका है।”
ट्रंप का यह बयान और ईरान का लाल झंडा — दोनों एक साथ बता रहे हैं कि यह जंग अभी और गहरी होने वाली है।
दुनियाभर में शोक और विरोध
खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद दुनियाभर में — खासकर शिया बहुल इलाकों में — शोक और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इराक में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित हो चुका है। लेबनान, बहरीन और पाकिस्तान में भी प्रदर्शन हो रहे हैं।
भारत में भी कुछ जगहों पर शिया समुदाय ने शोक सभाएं आयोजित कीं।
एक लाल झंडे ने पूरी दुनिया को एक ही सवाल के सामने खड़ा कर दिया है — आगे क्या होगा?
