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पासपोर्ट फ्रॉड को कहिए अलविदा, भारत में शुरू हुए RFID चिप वाले ई-पासपोर्ट

नई टेक्नोलॉजी से लैस ई-पासपोर्ट से बढ़ेगी सुरक्षा और आसान होगा इंटरनेशनल ट्रैवल

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RFID चिप से लैस नया ई-पासपोर्ट, जो पासपोर्ट सुरक्षा को देगा नई मजबूती

भारत ने पासपोर्ट सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए RFID चिप-आधारित ई-पासपोर्ट की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। यह पहल Passport Seva Programme 2.0 के तहत लाई गई है, जिसका मकसद पासपोर्ट से जुड़े फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और पहचान सत्यापन को पहले से ज्यादा मजबूत बनाना है।

अब तक कागज़ी पासपोर्ट पर निर्भर भारत, इस नई व्यवस्था के साथ उन देशों की कतार में खड़ा हो गया है जहां हाई-टेक पहचान दस्तावेज़ पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं। ई-पासपोर्ट न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि विदेश यात्रा को भी पहले से कहीं ज्यादा सुगम बनाएगा।

क्या है ई-पासपोर्ट और क्यों है खास?

ई-पासपोर्ट में एक RFID (Radio Frequency Identification) चिप लगी होती है, जिसमें पासपोर्ट धारक की व्यक्तिगत और बायोमेट्रिक जानकारी सुरक्षित रहती है। इस डेटा को Public Key Infrastructure (PKI) एन्क्रिप्शन से सुरक्षित किया जाता है, जिससे छेड़छाड़ या डेटा चोरी की आशंका बेहद कम हो जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकनीक पहचान की नकल, फर्जी पासपोर्ट और इमिग्रेशन फ्रॉड जैसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगी।

किन शहरों से हुई शुरुआत?

ई-पासपोर्ट की शुरुआत फिलहाल देश के 12 शहरों में की गई है। इनमें Delhi, Chennai, Jaipur, Surat और Bhubaneswar जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा धीरे-धीरे देशभर के सभी Passport Seva Kendras में उपलब्ध कराई जाएगी और 2025 के मध्य तक इसका विस्तार पूरे भारत में होने की उम्मीद है।

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पुराने पासपोर्ट का क्या होगा?

सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा कागज़ी पासपोर्ट पूरी तरह वैध रहेंगे। नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जब तक पासपोर्ट की वैधता खत्म नहीं होती, तब तक वह सामान्य रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, नया पासपोर्ट बनवाते समय या रिन्यूअल के दौरान नागरिक ई-पासपोर्ट का विकल्प चुन सकते हैं।

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

ई-पासपोर्ट के लागू होने से भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच जाएगा। इमिग्रेशन काउंटर पर जांच तेज होगी, पहचान सत्यापन में पारदर्शिता आएगी और यात्रियों को लंबी कतारों से राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि यह पहल भविष्य में डिजिटल पहचान और सुरक्षित यात्रा की दिशा में एक मजबूत आधार बनेगी।

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