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चीन की सख्त चेतावनी अमेरिका को — “अगर 155% टैरिफ लगा, तो बीजिंग देगा जवाब”

अमेरिका द्वारा चीनी आयात पर 155% शुल्क लगाने की धमकी के बीच बीजिंग ने कहा — “हम संवाद चाहते हैं, लेकिन अगर दबाव बढ़ा तो हम जवाब देंगे”

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चीन की सख्त चेतावनी अमेरिका को — 155% टैरिफ की धमकी पर बीजिंग ने कहा “हम जवाब देंगे”
ट्रंप की 155% टैरिफ धमकी के बाद चीन ने दी चेतावनी — “अगर ज़रूरत पड़ी तो जवाब ज़रूर देंगे”

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के उत्पादों पर 155% तक का टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद बीजिंग ने कड़ा रुख अपनाया है। चीन के कोलकाता स्थित कौंसल जनरल शू वेई ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने यह “गलती” सुधारी नहीं, तो बीजिंग जवाब देने के लिए मजबूर होगा।

उन्होंने कहा, “हम संघर्ष नहीं चाहते, लेकिन अगर हमें धकेला गया, तो हम जवाब ज़रूर देंगे। हम अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।” चीन की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

“संवाद के दरवाज़े खुले हैं”

चीन के राजनयिक शू वेई ने कहा, “हम हमेशा से मानते हैं कि सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी है, जबकि टकराव सबको नुकसान पहुंचाता है। अगर अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, तो हमारे दरवाज़े खुले हैं। लेकिन अगर वह अपने फैसले पर अड़ा रहता है, तो हम उचित प्रतिक्रिया देंगे।”

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ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कहा था कि अगर चीन के साथ नवंबर 1 तक व्यापारिक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका 155% तक टैरिफ लगाने में संकोच नहीं करेगा। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा था कि बीजिंग “बहुत सम्मानजनक” रवैया अपना रहा है, लेकिन वह “अभी भी बहुत बड़ी राशि चुका रहा है।”

पहले भी हुआ है ऐसा तनाव

यह पहला मौका नहीं है जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनातनी हुई हो। 2018-19 में भी ट्रंप प्रशासन ने चीनी वस्तुओं पर भारी आयात शुल्क लगाए थे, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर समान टैक्स लगा दिया था। नतीजा यह हुआ कि दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार प्रभावित हुआ और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई।

चीन की सख्त चेतावनी अमेरिका को — 155% टैरिफ की धमकी पर बीजिंग ने कहा “हम जवाब देंगे”


विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार भी 155% टैरिफ लागू होता है, तो न केवल चीन और अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पहले ही चेताया है कि अगर यह व्यापारिक युद्ध लंबा चला, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की स्थिति आ सकती है।

भारत समेत अन्य देशों की चिंता

भारत सहित एशियाई देशों के लिए भी यह विवाद चिंता का विषय है। भारतीय निर्यातक पहले से ही डॉलर में उतार-चढ़ाव और सप्लाई संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में अमेरिका-चीन टकराव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

क्या शांतिपूर्ण समाधान संभव है?

चीन ने स्पष्ट किया है कि वह अभी भी संवाद के पक्ष में है। राजनयिकों का कहना है कि अगर दोनों देशों के शीर्ष नेता फिर से वार्ता की मेज़ पर बैठें, तो स्थिति संभल सकती है। हालांकि ट्रंप की नीतियों और बयानबाज़ी से यह स्पष्ट है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच “ट्रेड वॉर” का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।