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Iraq में अमेरिकी सैन्य विमान क्रैश, Iran-Israel युद्ध के बीच मचा हड़कंप! तेल 100 डॉलर पार, खाड़ी देशों में ड्रोन हमलों से बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जंग की आग और भड़कती दिख रही है — इराक में अमेरिकी KC-135 विमान दुर्घटनाग्रस्त, ईरान-इज़राइल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले तेज, लाखों लोग बेघर।

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इराक के ऊपर मिशन के दौरान अमेरिकी KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान, जो हवा में लड़ाकू विमानों को ईंधन देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच शुक्रवार को एक बड़ी घटना सामने आई जब इराक के पश्चिमी हिस्से में अमेरिकी सेना का एक KC-135 रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में कम से कम पाँच क्रू मेंबर सवार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार यह विमान अमेरिकी वायुसेना के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यह हवा में ही दूसरे लड़ाकू विमानों को ईंधन देने का काम करता है। ऐसे विमान युद्ध के दौरान लंबी दूरी तक मिशन जारी रखने में मदद करते हैं।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने शुरुआती जांच में कहा है कि यह हादसा किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर की वजह से नहीं हुआ। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।


1950 के दशक से सेवा में है KC-135 विमान

KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान को अमेरिकी कंपनी Boeing ने 1950 और 1960 के दशक में तैयार किया था। दशकों से यह विमान अमेरिकी सेना की एयर-रिफ्यूलिंग क्षमता की रीढ़ माना जाता है।

युद्ध या लंबी दूरी के ऑपरेशन के दौरान लड़ाकू विमानों को बीच हवा में ईंधन देना इस विमान की सबसे बड़ी भूमिका होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे विमान कम पड़ जाएं तो कई सैन्य मिशन प्रभावित हो सकते हैं।


तेल बाजार में उथल-पुथल, कीमतें 100 डॉलर के पार

इधर युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 9 प्रतिशत उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ाने की वजह से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इराक के कई तेल टर्मिनल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।


तेहरान और बेरूत पर इज़राइल के नए हमले

युद्ध के मोर्चे पर भी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान और लेबनान की राजधानी बेरूत में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।

इन हमलों का निशाना ईरान के कथित परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े ठिकाने बताए जा रहे हैं।

इज़राइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए।

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ईरान का पलटवार, इज़राइल पर मिसाइल दागी

इज़राइली हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल की ओर मिसाइलें दागीं। हालांकि इनमें से ज्यादातर मिसाइलें खुले इलाकों में गिरीं और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

खाड़ी क्षेत्र में तनाव इतना बढ़ गया है कि Saudi Arabia और Qatar को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से ईरान से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना पड़ा।


खाड़ी देशों में ड्रोन हमले, कई जगह आग

इस युद्ध की आग अब खाड़ी के कई देशों तक फैलती दिख रही है।

  • Kuwait में एक रिहायशी इमारत पर ड्रोन गिरने से आग लग गई।
  • Bahrain के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास बड़ा धमाका हुआ।
  • Riyadh के डिप्लोमैटिक इलाके को भी निशाना बनाया गया।

संयुक्त अरब अमीरात के शहर Dubai में सुरक्षा खतरे के कारण Citibank ने अपनी लगभग सभी शाखाएं अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है।


मानवीय संकट गहराया

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस संघर्ष ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी है।

  • Iran में करीब 32 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
  • Lebanon में भी लगभग 7.5 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।

राहत एजेंसियों का कहना है कि अगर जल्द युद्धविराम नहीं हुआ तो मध्य-पूर्व में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो सकता है।


अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक टकराव

इस पूरे संकट के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिका “काम पूरा करने” के लिए तैयार है।

वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि यह युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक दुनिया ईरान के “वैध अधिकारों” को स्वीकार नहीं करती और हुए नुकसान की भरपाई नहीं करती।


लंबे युद्ध की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष पीछे नहीं हटे तो यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिश और उसके जवाब में ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र को बहु-मोर्चे वाले युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है।

इराक में अमेरिकी विमान दुर्घटना और खाड़ी देशों पर हमलों ने साफ संकेत दे दिया है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है।

अधिक अपडेट के लिए- DAINIK DIARY

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