World News
ईरान संकट के बीच तेल की कीमतों पर Trump’s का बड़ा बयान: “कीमत बढ़े तो America को होता है फायदा”
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ में तनाव से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले – इससे अमेरिका को बड़ी कमाई
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक जगत में नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप का कहना है कि जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इससे अमेरिका को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होता है, क्योंकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन चुका है।
“तेल महंगा होता है तो अमेरिका कमाता है”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि अमेरिका की विशाल उत्पादन क्षमता के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश की आय बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि
“संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो हम बहुत पैसा कमाते हैं।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ बना वैश्विक चिंता का कारण
इस समय तेल बाजार में उथल-पुथल की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल का परिवहन होता है।
ईरान से जुड़े संकट के चलते यहां कई तेल और गैस टैंकर फंस गए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है और कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
पेट्रोल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी
कुछ सप्ताह पहले तक अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 2.30 डॉलर प्रति गैलन बताई जा रही थी। लेकिन हालिया संकट के बाद इसमें तेज उछाल आया है।
अमेरिका की ऑटोमोबाइल एसोसिएशन AAA के आंकड़ों के मुताबिक अब पेट्रोल की औसत कीमत 3.60 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
यानी बहुत कम समय में कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है।
ट्रंप ने पहले भी दिया था ऐसा बयान
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप पहले भी तेल की कीमतों को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं।
उन्होंने पहले कहा था कि ईंधन की कीमतें कम होना उनकी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। वहीं अब उनका कहना है कि अगर कीमतें कुछ समय के लिए बढ़ती भी हैं तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के लिए छोटी कीमत है।
ट्रंप का मानना है कि ईरान से जुड़े परमाणु खतरे को खत्म करना ज्यादा जरूरी है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है।
निवेश बैंक Goldman Sachs के विश्लेषकों ने हाल ही में तेल की कीमतों को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है।
उनके अनुसार:
- ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत साल के अंत तक लगभग 71 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है
- जबकि WTI क्रूड करीब 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है
हालांकि मौजूदा समय में कीमतें इन अनुमानों से कहीं ज्यादा ऊपर चल रही हैं।
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
वैश्विक बाजार में इस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जबकि WTI क्रूड भी 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
भारत जैसे देशों पर क्या असर?
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर ज्यादा पड़ता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अगर वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है तो इससे:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है
- अर्थव्यवस्था की गति प्रभावित हो सकती है
इसी वजह से पूरी दुनिया की नजर इस समय मध्य पूर्व की स्थिति और तेल बाजार की दिशा पर टिकी हुई है।
और पढ़ें- DAINIK DIARY
