International Affairs
Pakistan की बड़ी कूटनीतिक कोशिश — US और Iran के बीच फिर से बातचीत कराने की जुगत, Shehbaz Sharif जाएंगे Saudi Arabia
Islamabad में ceasefire वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन Pakistan ने हार नहीं मानी। Foreign Minister Ishaq Dar Saudi Arabia, Turkey और Egypt से कर रहे हैं समन्वय।
मध्य-पूर्व में तनाव की आग धधक रही है और उसे बुझाने की कोशिश में एक नया नाम उभरकर सामने आया है — Pakistan। Islamabad में हुई ceasefire वार्ता भले ही किसी नतीजे पर न पहुँच सकी हो, लेकिन Pakistan ने अपनी कूटनीतिक कोशिशें नहीं छोड़ी हैं। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक Pakistan अब United States और Iran के बीच दोबारा बातचीत कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
Islamabad में बातें हुईं, नतीजा नहीं निकला
Al-Arabi Al-Jadid को Pakistan के Foreign Ministry के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि अधिकारी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को Tehran के साथ फिर से बातचीत की मेज़ पर लाने के लिए प्रयासरत हैं। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन Pakistani, Iranian और American अधिकारियों के बीच हुई चर्चाओं को “सकारात्मक माहौल” में बताया गया और कहा गया कि तीनों पक्ष अभी भी बातचीत जारी रखने में रुचि दिखा रहे हैं।
यह कुछ वैसी ही स्थिति है जैसे 1999 में Atal Bihari Vajpayee की Lahore Bus Yatra के बाद शांति की उम्मीद बंधी थी लेकिन Kargil ने सब पलट दिया था। बातचीत की शुरुआत हो जाना एक बात है, उसे अंजाम तक पहुँचाना बिल्कुल अलग चुनौती है।
Ishaq Dar की सक्रिय कूटनीति
Pakistan के Foreign Minister Ishaq Dar इन दिनों diplomatic मोर्चे पर बेहद सक्रिय हैं। Dawn की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने Saudi Arabia, Turkey और Egypt के अपने समकक्षों से अलग-अलग बातचीत की है। इसका मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना और ceasefire को बनाए रखने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है।
यह कोशिश बताती है कि Pakistan सिर्फ दो देशों के बीच दूत की भूमिका नहीं निभा रहा, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय गठजोड़ बनाने की कोशिश कर रहा है।
Shehbaz Sharif का Saudi Arabia दौरा
Geo News और The New Arab के सूत्रों के अनुसार, Prime Minister Shehbaz Sharif अगले 48 घंटों के भीतर Saudi Arabia की यात्रा पर जाने वाले हैं। यह दौरा Middle East में नई diplomatic energy भरने की कोशिश का हिस्सा है।
Saudi Arabia की भूमिका इस पूरे समीकरण में अहम है। Riyadh पहले भी Iran के साथ रिश्ते सुधारने में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है और अब Pakistan उसी रास्ते पर चलना चाहता है।
Lebanon बना सबसे बड़ी रुकावट
लेकिन असली पेंच कहीं और है। Al-Araby Al-Jadeed को एक सूत्र ने बताया कि American side ने यह मानने से इनकार कर दिया कि Iran के साथ किसी भी संभावित deal में Lebanon को शामिल किया जाए।
American प्रतिनिधिमंडल, जिसमें Steve Witkoff और Jared Kushner शामिल थे, चाहते थे कि Lebanon का मुद्दा पूरी तरह Israel के हाथों में सौंप दिया जाए और इसे Iran से जुड़ी बातचीत से अलग रखा जाए। यानी Israel को यह अधिकार हो कि वह Lebanon के साथ शांति से या युद्ध से जैसे चाहे निपटे।
यह रुख Iran के लिए स्वीकार्य नहीं है क्योंकि Lebanon में Iran की strategic presence गहरी है और Hezbollah से उसके संबंध किसी से छुपे नहीं हैं।

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Strait of Hormuz पर भी टकराव
Pakistan के सूत्रों ने The New Arab को बताया कि Israeli war on Lebanon के अलावा Strait of Hormuz पर नियंत्रण का मसला भी deal के रास्ते में बड़ी रुकावट बना हुआ है। Strait of Hormuz दुनिया का सबसे संवेदनशील oil transit route है जहाँ से दुनिया के कुल oil shipment का करीब 20 प्रतिशत गुज़रता है।
अगर यह Strait किसी भी कारण से बंद होता है या इस पर नियंत्रण को लेकर टकराव होता है तो इसका असर दुनियाभर के तेल बाज़ारों पर पड़ेगा। India जैसे देश जो अपनी energy ज़रूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं, उन्हें भी इसकी सीधी मार झेलनी पड़ सकती है।
Pakistan के लिए यह दाँव क्यों ज़रूरी है
Pakistan की इस पूरी कूटनीतिक सक्रियता के पीछे सिर्फ परोपकार नहीं है। अगर Middle East में स्थिरता आती है तो Pakistan को भी फायदा होता है। एक तरफ Saudi Arabia और Gulf countries में Pakistan के लाखों workers काम करते हैं जो हर साल अरबों रुपये का remittance भेजते हैं। दूसरी तरफ Iran से Pakistan की लंबी सीमा लगती है और अगर उस पार अस्थिरता बढ़ती है तो उसका असर Pakistan की सुरक्षा पर भी पड़ता है।
इस लिहाज़ से Pakistan की यह कोशिश सिर्फ एक mediator की भूमिका नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी है।
आगे क्या होगा
फिलहाल स्थिति यह है कि बातचीत का दरवाज़ा बंद नहीं हुआ है, लेकिन खुला भी पूरी तरह नहीं है। Lebanon और Strait of Hormuz जैसे अहम मुद्दों पर जब तक सहमति नहीं बनती, कोई बड़ा deal संभव नहीं दिखता।
Shehbaz Sharif का Saudi दौरा और Ishaq Dar की diplomatic कोशिशें आने वाले दिनों में कोई नई राह खोल सकती हैं। लेकिन जैसा कि Middle East की राजनीति में अक्सर होता है, यहाँ कोई भी नतीजा पहले से तय नहीं होता।
