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Iran को जड़ से उखाड़ो! Saudi के Mohammed bin Salman ने Trump को दी यह सलाह — NYT की रिपोर्ट से मचा हड़कंप
New York Times की एक explosive रिपोर्ट के मुताबिक Saudi Crown Prince Mohammed bin Salman ने Donald Trump पर दबाव बनाया कि Iran की मौजूदा सरकार पूरी तरह खत्म होने तक जंग जारी रखी जाए — यहाँ तक कि ground operation तक की बात हुई।
US-Iran जंग को एक महीना होने वाला है। एक तरफ ceasefire और बातचीत की उम्मीदें हैं, दूसरी तरफ एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
The New York Times ने दावा किया है कि इस जंग को लंबा खींचने के पीछे एक Gulf nation की अहम भूमिका रही है — और वो देश है Saudi Arabia।
Mohammed bin Salman का Trump को संदेश — “Iran को जड़ से खत्म करो”
NYT की रिपोर्ट के मुताबिक Saudi Crown Prince Mohammed bin Salman ने पिछले एक हफ्ते में Donald Trump से कई बार फोन पर बात की और हर बार एक ही बात कही — Iran की “hard-line government” को पूरी तरह तबाह किए बिना जंग मत रोको।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि Prince Mohammed ने Trump को साफ कह दिया कि अगर अभी पीछे हट गए, तो Saudi Arabia और Middle East के बाकी देशों को एक और भी ज़्यादा आक्रामक Iran का सामना अकेले करना पड़ेगा।
यानी मतलब साफ है — Prince Mohammed को डर है कि अधूरी जंग से Iran और ताकतवर होकर निकलेगा।
Ground Operation तक की सलाह?
सिर्फ जंग जारी रखने की बात नहीं — रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Prince Mohammed ने Trump से Iran के अंदर सैनिक भेजने यानी ground operation की भी वकालत की। मकसद — Iran के key energy infrastructure पर कब्ज़ा और regime change।
इसके साथ ही Trump ने Kharg Island — जो Iran का सबसे अहम oil export hub है — पर हमले पर गंभीरता से विचार किया। इसके लिए airborne Army forces या Marine amphibious assault जैसे options भी सामने आए, हालांकि ऐसा कोई भी ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा होगा।
यह वही Trump हैं जिन्होंने सोमवार को Iran के energy और nuclear ठिकानों पर हमले अगले पाँच दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया था।
जंग की शुरुआत कैसे हुई?
US और Israel का कहना है कि उनके हमले preemptive थे — यानी Iran पहले हमला करने वाला था। लेकिन कई observers मानते हैं कि Israel ने Washington को इस फैसले के लिए प्रभावित किया और वो अब भी किसी भी ceasefire का विरोध कर रहा है।
Trump ने हाल ही में एक event में संकेत दिया कि उनके defence secretary Pete Hegseth उनकी administration में military action की सबसे पहले वकालत करने वाले senior official थे।
Iran का रुख — बातचीत? बिल्कुल नहीं
जबकि Pakistan में वार्ता की खबरें आ रही हैं, Iran के Fars News Agency के मुताबिक Tehran किसी ऐसे शख्स से बात करने के मूड में नहीं जो “झूठा है और जिसमें सम्मान, इंसानियत या양जमीर का कोई निशान नहीं।” यह इशारा साफ तौर पर Trump की तरफ था।
Saudi Arabia ने किया इनकार — “हम शांति के पक्ष में हैं”
NYT की रिपोर्ट सामने आते ही Saudi government हरकत में आई। Saudi officials ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि kingdom हमेशा से diplomatic solutions की पक्षधर रही है।
Saudi government के बयान में कहा गया — “Saudi Arabia ने हमेशा इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहा है — जंग शुरू होने से पहले भी।”
बयान में यह भी जोड़ा गया कि Saudi के oil installations खुद इस जंग में निशाना बन चुके हैं और लंबी जंग उनकी अपनी economy के लिए भी नुकसानदेह है।

“हमारी सबसे बड़ी चिंता आज यह है कि हम अपने लोगों और civilian infrastructure की रोज़ हो रहे हमलों से रक्षा करें। Iran ने serious diplomatic solutions की बजाय dangerous brinkmanship चुनी है — इससे हर stakeholder को नुकसान है, लेकिन सबसे ज़्यादा Iran को खुद।”
White House ने मुँह नहीं खोला
जब NYT ने White House से जवाब माँगा, तो Press Secretary Karoline Leavitt ने comment करने से साफ इनकार कर दिया — “हम राष्ट्रपति की private conversations पर टिप्पणी नहीं करते।”
यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ कह देती है।
असली खेल क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि Saudi Arabia के लिए Iran हमेशा से एक long-term strategic threat रहा है — धर्म के आधार पर भी, और regional power के आधार पर भी। अगर Iran की मौजूदा सरकार कमज़ोर होती है या बदलती है, तो Saudi Arabia Middle East में खुद को कहीं ज़्यादा सुरक्षित महसूस करेगा।
लेकिन सार्वजनिक तौर पर इस बात को स्वीकार करना — diplomacy में — आत्मघाती हो सकता है।
इसीलिए Prince Mohammed की “phone diplomacy” और Saudi government का “peace statement” — दोनों एक साथ चल रहे हैं।
और बीच में फँसे हैं Trump — जो एक तरफ Pakistan में peace talks की तरफ बढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ Riyadh का दबाव झेल रहे हैं।
