National News
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर आपकी जेब पर ईद से पहले महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
Strait of Hormuz बंद, कच्चे तेल के दाम $80 के पार — भारत की 88% तेल ज़रूरत विदेश से आती है। जानिए आपके शहर में क्या है आज का भाव और आगे क्या होने वाला है।
नई दिल्ली। दुनिया के किसी कोने में लड़ाई होती है — और उसकी आँच सबसे पहले आम आदमी की जेब तक पहुँचती है। पेट्रोल पंप पर खड़े होकर जब आप नोट गिनते हैं, तब शायद नहीं सोचते कि हज़ारों किलोमीटर दूर मध्य पूर्व में चल रही जंग का आपसे सीधा रिश्ता है।
लेकिन है। और इस बार बहुत गहरा है।
ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें उछल पड़ी हैं। और अब सवाल यही है — क्या होली से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?
अभी क्या है आपके शहर में भाव?
6 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें भारत के प्रमुख शहरों में स्थिर रहीं। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 103.49 रुपये और डीजल करीब 90.03 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में सबसे महंगा पेट्रोल 107.45 रुपये जबकि कोलकाता में 104.99 रुपये प्रति लीटर है।
और भी पढ़ें : ईरान की आक्रामक कार्रवाई पर सऊदी अरब भड़का, खाड़ी देशों की संप्रभुता के उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी
यानी फिलहाल कीमतें स्थिर हैं — लेकिन यह चैन कब तक?
कच्चा तेल क्यों भड़का?
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में Brent Crude तेल की कीमत $80 प्रति बैरल के करीब पहुँच गई है। अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स में 8.6% की उछाल आई — जो पिछले शुक्रवार के $67 से बढ़कर $72.79 पर आ गई।
इसकी वजह है — Strait of Hormuz।
क्या है Strait of Hormuz — और यह इतना ज़रूरी क्यों है?
Strait of Hormuz एक संकरा जलमार्ग है जो ईरान और ओमान-UAE के बीच स्थित है। इसकी चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर है। लेकिन इसी रास्ते से दुनिया के 20 से 30 प्रतिशत तेल और LNG की आपूर्ति होती है।
इसे ऐसे समझें — यह वो नल है जिससे दुनिया का एक तिहाई तेल बहता है। अगर यह नल बंद हो जाए, तो पूरी दुनिया प्यासी हो जाती है।
ईरान के IRGC ने Strait of Hormuz को “बंद” घोषित कर दिया है और चेतावनी दी है कि इससे गुज़रने वाले किसी भी जहाज़ पर हमला किया जाएगा।
भारत के लिए खतरा कितना बड़ा?
भारत की करीब 50% कच्चे तेल की ज़रूरत और 60% LNG इसी Strait of Hormuz से होकर आती है। भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का 88-89% विदेश से मँगाता है।
सोचिए — अगर आपके घर की रसोई गैस और गाड़ी का ईंधन एक ही रास्ते से आता हो और वो रास्ता बंद हो जाए, तो क्या होगा?
जानकारों के अनुसार, क्रूड में हर 1 डॉलर की बढ़ोत्तरी भारत के सालाना तेल आयात बिल में करीब 2 अरब डॉलर का बोझ जोड़ती है।

होली से पहले बढ़ेंगे दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियाँ होली से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम 4-5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली में पेट्रोल 95 रुपये से बढ़कर 100 रुपये और डीजल 88 से 92 रुपये हो सकता है।
Indian Oil, HPCL और BPCL जैसी तेल मार्केटिंग कंपनियाँ वैश्विक कीमतों की बढ़ोत्तरी उपभोक्ताओं पर डालने की स्थिति में हो सकती हैं।
सरकार क्या कर रही है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास अभी करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है और फिलहाल दाम बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है। साथ ही वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
चुनावी राज्यों — पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम — में विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार किसी भी तीव्र मूल्य वृद्धि से बचना चाहेगी।
आम आदमी को क्या करना चाहिए?
फिलहाल घबराने की ज़रूरत नहीं। लेकिन सतर्क रहें। अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, Hormuz बंद रहा और कच्चे तेल की कीमतें $90-100 के पार गईं — तो पेट्रोल-डीजल महंगा होना तय है।
जिस तरह एक किसान बारिश आने से पहले फसल काट लेता है — उसी तरह, अगर आपके पास दो-पहिया या चार-पहिया वाहन है, तो ज़रूरत के हिसाब से तैयार रहें।
मध्य पूर्व की यह जंग सिर्फ वहाँ के लोगों की नहीं — हम सबकी जेब की भी लड़ाई बन गई है।
