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Maharashtra विधानसभा ने पास किया बड़ा बिल 200 साल पुराने 80 पुराने कानून एक झटके में हुए खत्म

1825 से लेकर 1957 तक के बेकार पड़े कानूनों की हुई छुट्टी — Ashish Shelar बोले: “पुराने कानून प्रशासन में पैदा कर रहे थे भ्रम”

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Maharashtra ने खत्म किए 80 पुराने कानून — 1825 का कानून भी था लिस्ट में | Dainik Diary
Maharashtra विधानसभा — जहां मंगलवार को सन् 1825 से 1957 के बीच बने 80 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को एक ही बिल से समाप्त कर दिया गया। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Mumbai। कल्पना कीजिए कि आपके घर में कोई ऐसा पुराना नियम हो — जैसे “मेहमान आने पर दरवाज़ा बाईं तरफ से खोलो” — जो दशकों से कागज़ों पर तो दर्ज हो, लेकिन न कोई उसे मानता हो और न कोई उसकी ज़रूरत हो। फिर एक दिन आप उस नियम को हटाने का फैसला करें। Maharashtra सरकार ने कुछ ऐसा ही किया — लेकिन बड़े पैमाने पर।

Maharashtra विधानसभा में मंगलवार को एक अहम बिल पास हुआ जिसके ज़रिए 80 पुराने और बेकार पड़े कानूनों को एक साथ खत्म किया गया। यह कदम सुशासन को मज़बूत करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।

किसने पेश किया यह बिल?

Maharashtra Repealing Bill, 2026 (Assembly Bill No. 17) को सामान्य प्रशासन मंत्री Ashish Shelar ने सदन में पेश किया। विस्तृत चर्चा के बाद इसे सदन ने पास कर दिया। Shelar ने कहा कि संवैधानिक बदलावों, राज्य पुनर्गठन और नए कानूनों के लागू होने के कारण Maharashtra में कई अधिनियम पुराने पड़ गए थे। उनके हवाले देते रहने से शासन में अस्पष्टता पैदा हो रही थी।

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कितने और किस तरह के कानून हटाए गए?

मंत्री Shelar ने बताया कि रद्द किए गए 80 कानूनों में 24 Bombay Acts, 8 Central Provinces & Berar Acts, 18 Hyderabad Acts, 3 Madhya Pradesh Acts और 24 Appropriation Acts शामिल हैं। इन कानूनों की समीक्षा Bombay, Bengal, Central Provinces & Berar, Hyderabad और Madhya Pradesh क्षेत्रों के सभी मौजूदा राज्य कानूनों को खंगालकर की गई।

कौन से कानून थे ये?

जो कानून हटाए गए उनमें से कुछ तो इतने पुराने हैं कि उन्हें पढ़कर हंसी भी आए और हैरानी भी। इनमें शामिल हैं — The Bengal Alluvion and Diluvion Regulation, 1825; The Acknowledgements of Debts, Interest, Mortgages Regulation, 1827; The Broach and Kaira Encumbered Estates Act, 1877; The Bombay Abkari Act, 1878; The Borstal Schools Act, 1929; The Maharashtra Opium Smoking Act; The Bombay Fodder and Grain Control Act, 1939; The Bombay Cotton Control Act, 1942; और The Bombay Abolition of Whipping Act, 1957।

ज़रा सोचिए — Bombay Abolition of Whipping Act, 1957 यानी “कोड़े मारने पर रोक का कानून” अभी तक किताबों में दर्ज था। यह बताता है कि भारत के कानूनी ढांचे में आज़ादी के बाद भी कितने औपनिवेशिक अवशेष बचे रहे।

ठीक वैसे जैसे आज़ादी के बाद दशकों तक भारत में Indian Penal Code के नाम पर अंग्रेज़ों के ज़माने के कानून चलते रहे — जब तक 2023 में Bharatiya Nyaya Sanhita ने उन्हें बदला। Maharashtra का यह कदम उसी दिशा में एक राज्य स्तरीय सफाई अभियान है।

Maharashtra ने खत्म किए 80 पुराने कानून — 1825 का कानून भी था लिस्ट में | Dainik Diary


मतलब क्या आम लोगों के लिए?

पुराने और बेकार कानूनों के बने रहने से कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब अदालतों में, सरकारी दफ्तरों में या व्यापार के लिए अनुमति लेते वक्त पुराने कानून का हवाला दे दिया जाता है — और फिर शुरू होती है भागदौड़। एक ही विषय पर पुराना और नया — दोनों कानून मौजूद हों तो वकील, अधिकारी और नागरिक सब उलझ जाते हैं।

सरकार का कहना है कि इस कदम से व्यापार और नागरिकों के लिए यह समझना आसान होगा कि वास्तव में कौन सा कानून लागू होता है।

Human Rights Commission के लिए भी बड़ा कदम

इसी सत्र में गृह राज्य मंत्री Yogesh Kadam ने यह भी बताया कि सरकार ने राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए एक Nodal Officer की नियुक्ति की है और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक अलग बजट हेड और ऑनलाइन पोर्टल बनाने पर भी सकारात्मक रुख है।

असली परीक्षा अभी बाकी है

कानूनों को किताब से हटाना एक बात है — लेकिन असली सवाल यह है कि इससे ज़मीनी स्तर पर प्रशासन में कितनी तेज़ी आएगी। Maharashtra में अभी भी हज़ार से ज़्यादा कानून लागू हैं। 80 को हटाना एक शुरुआत है — पर सिर्फ शुरुआत।

जैसे घर की सफाई करते वक्त पुरानी अलमारी खाली करना ज़रूरी होता है — असली सवाल यह होता है कि अब उस जगह क्या नया और उपयोगी रखा जाएगा।

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