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ईरान तेल संकट से एशिया में EV की ‘बूम’: BYD और VinFast की बिक्री अचानक क्यों बढ़ी?
तेल कीमतों में उछाल के बाद लोग पेट्रोल कार छोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर, एशिया में EV बाजार को मिली नई रफ्तार
ईरान-इज़राइल तनाव के चलते वैश्विक तेल संकट ने जहां दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को झटका दिया है, वहीं इसका एक दिलचस्प असर एशिया के ऑटोमोबाइल बाजार पर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों को अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर मोड़ दिया है।
चीन की ऑटो कंपनी BYD और वियतनाम की VinFast इस बदलाव की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी हैं। कई देशों में इनके शोरूम पर ग्राहकों की भीड़ अचानक बढ़ गई है, जिससे बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है।
पेट्रोल महंगा, EV बना सस्ता विकल्प
मनीला (फिलीपींस) में एक डीलरशिप के सेल्समैन ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में ही एक महीने के बराबर ऑर्डर मिल गए। ग्राहक साफ तौर पर कह रहे हैं कि बढ़ती ईंधन कीमतों से बचने के लिए वे अब EV को चुन रहे हैं।
वहीं, हनोई (वियतनाम) में VinFast के शोरूम में ग्राहकों की संख्या चार गुना बढ़ गई है। यहां केवल तीन हफ्तों में करीब 250 इलेक्ट्रिक वाहन बिके—जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है।
एक ग्राहक ने बताया कि रोजाना 60-70 किलोमीटर के सफर में EV अपनाने से उन्हें काफी बचत हो रही है। यह दर्शाता है कि अब EV केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि जेब के लिए भी फायदेमंद विकल्प बन चुका है।
हॉर्मुज संकट का बड़ा असर
इस बदलाव की जड़ में है Strait of Hormuz का बंद होना, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चा तेल पहुंचता है। इस मार्ग के बाधित होने से एशिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और कीमतें तेजी से बढ़ीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी तेल महंगा होता है, EV की मांग अपने आप बढ़ जाती है। एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री के अनुसार, “ऊंची तेल कीमतें ग्रीन ट्रांजिशन को तेज करने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देती हैं।”

EV की बढ़ती पकड़ और चुनौतियां
हालांकि, EV की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी समस्या है चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और शुरुआती कीमत का ज्यादा होना।
फिर भी, एशिया के कई देशों में EV अपनाने की दर पहले से ही काफी तेज है। चीन में तो आधे से ज्यादा वाहन बिक्री EV या हाइब्रिड की है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।
सरकारें भी कर रहीं प्रोत्साहन
कुछ देशों ने इस मौके को भुनाने के लिए नीतियां भी बदली हैं। जैसे लाओस ने EV पर रजिस्ट्रेशन फीस 30% तक कम कर दी है, जबकि पेट्रोल वाहनों पर शुल्क बढ़ा दिया है।
इससे साफ है कि सरकारें भी अब EV को भविष्य मान रही हैं और लोगों को इस ओर प्रोत्साहित कर रही हैं।
क्या यह ट्रेंड लंबे समय तक रहेगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो EV की मांग और तेजी से बढ़ेगी। हालांकि, इसके लिए कंपनियों को सप्लाई बढ़ानी होगी और चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करना होगा।
फिलहाल, इतना तय है कि ईरान तेल संकट ने एशिया में EV क्रांति को एक नई गति दे दी है—और आने वाले समय में यह बदलाव और गहरा हो सकता है।
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